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Pilibhit News: बिलईखेड़ा और शाहगढ़ टीले में मिले पुरा महत्व के अवशेष

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बिलई खेड़ा टीले के पास पुरा महत्व के अवशेष का परीक्षण करते राज्य पुरातत्व विभाग के अ​धिकारी  स्
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पीलीभीत। ऐतिहासिक बिलईखेड़ा टीला, गौरी शंकर मंदिर और शाहगढ़ टीला व मंदिर के पुरातात्विक महत्व को जानने राज्य पुरातत्व विभाग के सहायक अधिकारी राजीव त्रिवेदी शनिवार को पीलीभीत पहुंचे। उन्होंनेे सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शिवम कश्यप के साथ जाकर बिलईखेड़ा टीला और शाहगढ़ किले में मिले बर्तन, मूर्तियां और अन्य अवशेष देखे। यह अवशेष कुषाणकालीन बताए जा रहे हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने फरवरी में डीएम को शिकायती पत्र देकर जहानाबाद के ऐतिहासिक बिलईखेड़ा टीला के पास हो रहे खनन को रुकवाने और टीले की पुरा जांच कराने की मांग की थी। इस पर डीएम ने राज्य पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा था। बरेली-सितारगंज हाईवे निर्माण के दौरान एनएचएआई की कार्यदायी कंपनी की ओर से टीले पर मनमाने तरीके से खनन किया गया। इसको लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कीं।
इस संबंध में पुरातत्व विभाग से भी बात की गई। शनिवार को पुरातत्व विभाग के सहायक अधिकारी राजीव त्रिवेदी ने पीलीभीत पहुंचकर गौरीशंकर मंदिर, बिलईखेड़ा टीला और शाहगढ़ किले का भ्रमण किया। टीले के मिले मिट्टी के बर्तनों का परीक्षण किया। यह कितने पुराने हैं, इसकी जांच की। टीले पर हुए खनन से पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। शाहगढ़ में टीलों एवं मंदिर का बारीकी से निरीक्षण किया।
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करीब 2000 वर्ष पुराने हैं अवशेष



राज्य पुरातत्व विभाग के सहायक अधिकारी राजीव त्रिवेदी ने बताया कि शाहगढ़ किले में मिले अवशेष और मंदिर की मूर्तियां कुषाणकालीन प्रतीत हो रही हैं। इस हिसाब से यह करीब 2000 वर्ष पुराने हैं। बिलईखेड़ा टीला से मिले अवशेष भी इतने ही पुराने हो सकते हैं। परीक्षण किया जा रहा है। बिलईखेड़ा टीले में सड़क निकलने के बाद जो भाग बचा है उसके राजस्व संबंधी अभिलेख लिए जाएंगे। इसके बाद परीक्षण कराया जाएगा। गौरी शंकर मंदिर से संबंधी जानकारी भी जुटाई है।
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