कलीनगर। बराही के जंगल और शारदा डैम की तलहटी में स्थित सैय्यद सेल्हा बाबा के 25 मार्च को शुरू होने वाले 61 वें उर्स को लेकर तैयारियां तेज कर दी गईं हैं। दरगाह में आस्था रखने वाले कई जनपदों के लोग उर्स के मुबारक मौके पर आते हैं। मन्नत पूरी होने पर मुर्गे काटकर चढ़ाते हैं। हजारों मुर्गे तबर्रुक (प्रसाद) में बांटे जाते हैं।
सेल्हा बाबा की दरगाह पर 25 मार्च से पांच रोजा उर्स का आगाज होगा। वैसे तो पूरे वर्ष जायरीन के आने का सिलसिला लगा रहता है। लेकिन उर्स के दौरान जनपद के अलावा दूरदराज इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। जायरीन के आने-जाने के लिए उर्स के दिनों में निजी बस सेवाएं चलती हैं। उनके ठहरने का इंतजाम भी होता है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ भीड़ पर नजर रखने के लिए पुलिस और पीएसी तैनात होती है। दरगाह के आसपास मुर्गे की बिक्री करने वाली 50 से अधिक दुकानें लगती हैं। हजारों मुर्गों की बिक्री हो जाती है। अकीदतमंद मुर्गें को काटकर चढ़ाते हैं फिर प्रसाद मानकर उसको खाते हैं। मुर्गा न खाने वाले दरगाह पर ही मुर्गा छोड़ देते हैं या फिर कमेटी के सदस्यों या अन्य लोगों को दे देते हैं। जो प्रसाद के तौर पर बंट जाता है। मुर्गा व्यापारी अजहरुद्दीन ने बताया कि मेले के दौरान करीब पचास से अस्सी हजार मुर्गों के बिक्री होने की उम्मीद है। बाहर की मंडियों में मुर्गे का ऑर्डर दे दिया गया है।
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बंजारा समुदाय के लोगों की विशेष मान्यता
दशकों पहले कभी दरगाह क्षेत्र से लेकर नेपाल तक बीहड़ होता था। बंजारा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मवेशियों की खरीद-फरोख्त के लिए नेपाल जाते थे। वापस लौटते समय जंगल क्षेत्र में मवेशी गुम हो जाते थे। मान्यता है कि सेल्हा बाबा की दरगाह पर मन्नत मांगने पर मवेशी मिल जाते थे। इसलिए वर्षों से जनपद के अलावा दूरदराज इलाकों से बंजारा समुदाय के लोग परिवार समेत यहां आते हैं।
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दरगाह से जुड़े हैं कई सिख परिवार
दरगाह से सटे इलाके में रहने वाले सिख समाज के कुछ लोगों की मान्यता है कि जब उनकी भैंस किसी कारण दूध देना बंद कर देती है तो यहां पर मन्नत मांगते हैं। भैंस दूध देना शुरू कर देती है। तब वह खीर पकाकर दरगाह पर प्रसाद के रूप में वितरित करते हैं।
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उर्स को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। पांच रोजा उर्स के दौरान दूर दराज से भी जायरीन पहुंचते हैं। उनकी की सुविधा के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं। मुर्गे कटने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए सफाई व्यवस्था नियमित रखने पर भी बल दिया जाता है।
- अकीलुर्रहमान खां, सदर, सेल्हा कमेटी