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कॉलेजों में लौटी रौनक, छात्र बोले- ऑनलाइन नहीं हो पा रही पढ़ाई

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स्कूल खुलने पर अपने दोस्तों से मिलकर छात्र खुश नजर आए। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। करीब एक महीने बाद इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज सोमवार से खुल गए। करीब एक महीने से सूने पड़े कॉलेजों में रौनक नजर आई। क्लास के बाद पहले की तरह छात्रों की टोलियां घूमते नजर आईं। पढ़ाई के साथ दोस्तों से मिलना हुआ तो उनके चेहरे भी खिले नजर आए। हालांकि सरकारी कॉलेजों में पहले दिन छात्रों की संख्या काफी कम नजर आई। विद्यार्थी ऑनलाइन की जगह ऑफलाइन कक्षाओं का संचालन बेहतर बताया। बोले कि ऑनलाइन में कुछ समझ नहीं आता था। जरूरी था कि कॉलेज खुलें और उनकी पढ़ाई शुरू हो सके।
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पहले दिन सरकारी कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम नजर आई लेकिन निजी में अच्छी संख्या में छात्र नजर आए। इंटर कॉलेजों से लेकर डिग्री कॉलेजों में मुख्य परीक्षाएं करीब हैं। उससे पहले प्रैक्टिल भी होने हैं तो छात्र भी इसको लेकर चिंतित थे। ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर विद्यार्थियों के पास मोबाइल नहीं हैं, जिनके पास हैं तो बेहतर इंटरनेट सेवा न होने के कारण वीडियो क्लियर नहीं चलता। विद्यार्थियों का कहना है कि ऑनलाइन कुछ भी समझ नहीं आता। कुछ पूछना हो तो एक घंटे की क्लास में क्या पूछे। कॉलेज में कक्षाएं चलेंगी तो ज्यादा बेहतर तरीके से उनकी पढ़ाई हो सकेगी। विषय के बारे में कुछ पूछना हो तो शिक्षकों से आसानी से पूछ सकते हैं।
छात्रों की बातचीत
ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। गांव में नेटवर्क नहीं। फिर मोबाइल पर ठीक से चीजें समझ नहीं आती। अब परीक्षाएं करीब हैं। क्लास में बेहतर पढ़ाई हो पाती है। यहां कुछ पूछना हो तो सभी टीचर्स हैं। ऑनलाइन में तो कुछ समझ ही नहीं आता।
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- कशिश, बीए प्रथम उपाधि कॉलेज
ऑनलाइन तैयारी नहीं हो पा रही थी। घर में कुछ न कुछ काम लगा रहता है। ऑफलाइन क्लास शुरू होना बहुत जरूरी था। जब ठीक से पढ़ाई ही नहीं होगी तो परीक्षा में क्या लिखेंगे। ऑनलाइन में तो वैसे भी आधी बातें समझ नहीं आती।
- अर्चिता, बीएससी प्रथम उपाधि कॉलेज
ऑनलाइन में टॉपिक का कंसेप्ट ही समझ नहीं आता। हमारे कोर्स में न्यूमेरिकल ज्यादा है। ऑनलाइन में सारी चीजें ठीक से समझ नहीं आती। अब परीक्षाएं भी करीब हैं। कॉलेज में पढ़ाई का माहौल भी मिल जाता है। घर में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता।
- रकछंदा, बीकॉम फाइनल उपाधि कॉलेज
मैं गांव में रहती हूं। वहां इंटरनेट की स्पीड काफी कम रहती है। मोबाइल की सुविधा नहीं। ऑनलाइन क्लास के लिए पापा का मोबाइल लेते थे। ठीक से पढ़ाई ही नहीं हो पाती थी। ऑफलाइन में क्लास में बैठकर पढ़ने को मिलता है तो ज्यादा बेहतर समझ आता है।
प्रियंका, कक्षा 11, अवंतीबाई बालिका इंटर कॉलेज
घर पर पढ़ाई नहीं हो पाती। ऑनलाइन क्लास में छोटी स्क्रीन पर पढ़ते, कुछ समझ ही नहीं आता। फिर बच्चे बोलते बहुत हैं। गांव में इंटरनेट स्पीड कम होने से वीडियो भी साफ नहीं होता। अब कॉलेज में क्लास लगेंगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
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- कनक सक्सेना, अवंतीबाई बालिका इंटर कॉलेज
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