पूरनपुर। किसान आंदोलन और तिकुनिया हिंसा के कारण सिख बहुल इलाकों में भाजपा का विरोध हो रहा था। लेकिन इन क्षेत्रों में भी भाजपा को लोगों ने वोट दिए। ये अलग बात है कि यहां भाजपा से आगे सपा रही।
गांव पिपरिया मझरा में कुछ सिख किसानों ने प्रचार को पहुंचे विधायक बाबूराम पासवान के पुत्र ऋतुराज पासवान के सामने अपना विरोध दर्ज कराया था। हालांकि ऋतुराज का कहना था कि मात्र कुछ किसान ही उनका विरोध कर रहे हैं, जबकि गांव के अधिकतर लोग उनके साथ है। गांव पिपरिया मझरा में बाबूराम को 378 मत मिले। हालांकि सपा प्रत्याशी को यहां से 984 मत मिले। कजरी निरंजनपुर भी सिख किसान बहुल गांव है। इस गांव में सपा प्रत्याशी के पक्ष में 565 लोगों ने जबकि भाजपा प्रत्याशी के लिए 157 लोगों ने मतदान किया। गढ़वाखेड़ा और अंडबोझी गांव भी सिख किसान बहुल गांव है। गढ़वाखेड़ा में सपा प्रत्याशी के पक्ष में 452 और भाजपा के पक्ष में 222 लोगों ने मतदान किया। अंडबोझी गांव में सपा प्रत्याशी के लिए 393 लोगों ने और भाजपा प्रत्याशी बाबूराम पासवान के लिए 111 लोगों ने मतदान किया।
सिखों के विरोध का इतना असर जरूर हुआ कि बाबूराम पासवान की जीत का अंतर घट गया। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें 39242 वोटों से हासिल जीत हासिल हुईं थी। इस बार 26576 मतों से जीते। सियासी जानकारों का कहना है कि सिख बहुल गांवों में सिख मत तो बहुत कम मिला। लेकिन जो दूसरी जातियों के लोग उन गांवो में थे, उन्होंने भाजपा को वोट दिया। वहीं कुछ सिखों ने निजी संबंधों पर के आधार पर वोट दिए।
इसके अलावा पार्टी ने सिख वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए भी खास प्लान बनाया। भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने बताया कि किसान और सिख वोट साधने के लिए एमएलसी हरि सिंह ढिल्लों और जिला पंचायत अध्यक्ष डा. दलजीत कौर तथा उनके पति गुरुभाग को लगाया गया था। जमीनी स्तर पर प्रयासों का नतीजा है कि विरोध वाले गांवों में भी भाजपा को मत मिला है।