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मुद्दों पर खूब मचता हल्ला...फिर धर्म-जाति में बंट जाती जनता

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पीलीभीत। चुनाव फिर सामने हैं, मुद्दों की भी भरमार है, चाहें शिक्षा हो या रोजगार, चिकित्सा हो या यातायात। मुद्दों पर चर्चा भी पुरजोर है, लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी चुनाव आते-आते मुद्दों का ये हल्ला बोल धर्म-जाति के समीकरणों में बंटता नजर आ रहा है। शहर के अधिकतर लोगों का मानना है कि विकास के नाम पर पीलीभीत पीछे धकेल दिया गया। यहां के बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए दूसरे शहरों को जाते हैं, रोजगार के साधन नहीं, पर्यटन की अपार संभावनाएं, लेकिन ध्यान कोई नहीं देता। चुनाव के वक्त नेता जनता के बीच आते हैं, सियासी नफा नुकसान के हिसाब से बातें करते हैं और जनता उसी रंग में डूब जाती। मौजूदा वक्त में जरूर कुछ काम हुए हैं, लेकिन यहां एक सड़क बनने में भी सालों बीत जाते हैं। दर्जनों पुल अधूरे पड़े, यातायात की बेहतर सुविधा नहीं। महंगाई पर कोई बात सुनने को तैयार नहीं। चुनाव आते ही कहीं मंदिर का मुद्दा छाया तो कहीं मस्जिद का। जाति-बिरादरी के नाम पर भी समाज को बांट दिया जाता है। यही वजह है कि इन दिनों नेता भी जाति के समीकरण फिट बैठाने की जुगत में जुटे हैं। लगभग हर पार्टी के नेता के पास जातिगत आंकड़ों की पूरी फाइल तैयार है और उसी अनुसार वह रणनीति बनाने में लगे हैं।
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1-
हमारे जिले में तमाम मुद्दे हैं जिनपर न केवल बात होनी चाहिए बल्कि नेताओं को उनपर काम भी करना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। चुनावी माहौल में समाज बंटा नजर आता है। कोई धर्म जाति देखता है तो कोई बिरादरी। पिछले कुछ चुनाव में ऐसी ही तस्वीर नजर आती रही है। समाज का असल विकास तभी होगा तब हम सब एकजुट होकर मुद्दे उठाएंगे तभी काम होंगे।
- डॉ. मुकेश कुमार सक्सेना, चिकित्सक
2
महिला सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा जैसे कई मुद्दे हैं जिनपर बात होनी चाहिए। नेता की साफ छवि भी देखनी चाहिए, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि होता इससे बिल्कुल उलट। चुनाव पर धर्म जाति के मुद्दे हावी हो जाते हैं। चुनाव आयोग को तो ऐसे उम्मीदवारों पर ही लगाम लगा देनी चाहिए जो विकास के मुद्दे के बजाए धर्म जाति के नाम पर लोगों के जहन में जहर घोलता हो।
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- प्रीति सिंह, शिक्षक
3
हमारे जिले की बदकिस्मती ही है जो इतने संसाधन होने के बावजूद विकास में पीछे है। अच्छी शिक्षा के लिए बच्चों को बाहर भेजना पड़ता। व्यापारियों को दिल्ली जाना है तो ट्रेन नहीं। सिर्फ नेता ही नहीं हम सब इसके जिम्मेदार हैं। चुनाव में इन मुद्दों को लेकर नेताओं को घेरने के बजाए लोग उनकी बातों में आकर बंट जाते हैं। कोई हिंदू हो जाता है तो कोई मुसलमान। विकास की जगह मंदिर-मजिस्द की बातें होने लगती। लोगों को जागरूक होना होगा तभी जिले और शहर का विकास हो सकेगा।
- अफरोज जिलानी, व्यापारी
4
मेरा मानना है कि धर्म-जाति को लेकर जारी होने वाले आंकड़ों पर रोक लगनी चाहिए। जो पार्टी देश समाज के विकास की बात करे उसे ही वोट देना चाहिए। चुनाव आयोग को ऐसे नेताओं के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए जो चुनाव में धर्म जाति की एंगल लेकर आते हैं। जाति धर्म के आधार पर बंटवारा करने वाले लोगों का टिकट ही काट देना चाहिए। लोगों को धर्म जाति से ऊपर उठकर मतदान करना चाहिए।
-चंद्रभान शर्मा, प्रधानाचार्य, चिरौंजीलाल वीरेंद्र पाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
5
नेता तो वोट हथियाने को हर हथकंडे प्रयोग करते हैं, लेकिन लोगों को तो समझना चाहिए। हमारे शहर के लिए क्या जरूरी है, क्या होना चाहिए, जो इन मुद्दों की बात करे तो उसका साथ दें। नेता कोई भी हो, वो समाज का बांटकर ही चुनावी गणित लगाते हैं। देश-समाज का विकास तभी संभव है जब हम धर्म-जाति से ऊपर उठकर सिर्फ मुद्दों की बात करें। खासकर युवाओं को ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है, क्योंकि नेता उन्हें को जल्दी बरगला लेते हैं।
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- अंचल गुप्ता, प्रबंध निदेशक जेएमबी कॉलेज
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