पीलीभीत। वन और वन्यजीवों से संबंधित सूचनाओं को एकत्र करने और समय रहते उस पर अमल करने की प्रक्रिया अब मजबूत होगी। संसाधन मिलने के बाद पीटीआर मुख्यालय में मास्टर कंट्रोल रूम बनाने की कवायद तेज हो गई है।
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल की सीमा नेपाल और उत्तराखंड से मिलती है। इसके चलते जंगल में अवैध घुसपैठ की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। वहीं बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या अधिक होने से उनकी सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम भी विभाग के लिए चुनौती बना रहता है।
वन और वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी के लिए रेंज स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। फील्ड स्टाफ के जरिए कंट्रोल रूम में जानकारी मिलती है। बड़ी घटना पर अफसर भी गंभीर होते हैं, लेकिन मास्टर कंट्रोल रूम न होने से घटनाओं की मुख्यालय तक सूचना आने में देरी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए अफसरों की ओर से मुख्यालय पर मास्टर कंट्रोल रूम बनाने पर जोर दिया गया।
ग्लोबल टाइगर फोरम और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से कंट्रोल रूम को स्थापित करने के प्रयास शुरू किए गए थे। पूर्व में मास्टर कंट्रोल रूम से संबंधित संसाधन विभाग को उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बाद कंट्रोल रूम को स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि मास्टर कंट्रोल रूम स्थापित होने से सूचनाओं के आदान-प्रदान की स्थिति बेहतर हो सकेगी। इससे समय रहते टीम सूचनाओं पर अमल कर सकेगी।