गन्ना की फसल में पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। इसकी जानकारी होने पर गन्ना विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र में भ्रमण कर बीमारी की जानकारी ली और किसानों को इसके लक्षण और उपचार के बारे में बताया।
गन्ना की बुवाई से अब तक सीजन अनुकूल होने के कारण फसल अच्छी होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन पिछले दिनों मौसम में बार-बार बदलाव के कारण फसल पोक्का बोइंग रोग ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। सर्वे के दौरान इसकी शिकायत किसानों ने गन्ना विभाग के अधिकारियों से की। इस पर डीसीओ राजेश्वर यादव ने एससीडीआई जेएस भदौरिया के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर गन्ने का निरीक्षण किया। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ने की अगली पत्तियों, विशेष कर नई निकल रही पत्ती पर इस रोग का असर हो रहा है। इस रोग से प्रभावित पत्ती सूख जाती हैं। अभी रोग की प्रारंभिक अवस्था है। यह बहुत अधिक क्षेत्रफल में नहीं फैला है। उन्होंने किसानों को अपने खेतों का निरीक्षण करने एवं रोग मिलने पर तुरंत निदान करने की अपील की है।
लक्षण
अगोला में ऊपर की पत्ती हल्की पीली, सफेद होने लगती है। कुछ दिनों बाद लाल, भूरी होकर नष्ट हो जाती है। इससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। साथ ही प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बंद होने से गन्ना सूखने लगता है।
बचाव
- बुवाई से पूर्व बावस्टीन से उपचारित करें।
- खेतों में जैविक हाइड्रो कार्ड लगाएं।
- खट्टा मट्ठा लेकर फसल पर छिड़काव करें।
- रोगग्रस्त पौधे को उखाड़ कर नष्ट कर दें।
- कॉपर ऑक्सी क्लोराइड (बलाइटाक्स, ब्लू कॉपर) 300 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।
- हैक्सापोनाजोल (कंटॉप) 250 मिली 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ 15 दिन के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें।
गन्ने में पोक्का बोंइग रोग लगने की जानकारी मिली है। क्षेत्र में निरीक्षण किया गया है। रोग की उपस्थित मिलने पर किसानों को इसके बचाव के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
- राजेश्वर यादव, जिला गन्ना अधिकारी