05 से 25 हजार तक हो रही उगाही, जांच में निकल रहे अपात्र
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को आवास दिए जाने हैं। लेकिन यह योजना पंचायत सचिव, प्रधान से लेकर ब्लॉक और जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए कामधेनु साबित हो रही है। अधिकारियों पर पांच से 25 हजार रुपये तक रिश्वत लेने के आरोप लग रहे हैं। इसके चलते कई अपात्र भी आवास हासिल करने में कामयाब हो रहे हैं। ऐसी ही एक शिकायत पर डीएम ने एफआईआर के आदेश दिए हैं। साथ ही कुछ मामलों की जांच में अपात्रों को आवंटन मिलना पाया गया है। सरकार चाहे किसी की हो, गरीबों को रोजी रोटी, मकान सहित मूलभूत सुविधाएं देना सभी की प्राथमिकता रही है, लेकिन व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते इन योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों को नहीं मिल पाता है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर इंदिरा आवास के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ की गई। लेकिन यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है। गरीबों को छत भले ही मुहैया न हुई हो लेकिन योजना लागू करने वालों की कोठियां जरूर बन रही हैं। गांव में पात्रों के चयन से लेकर आवासों का निर्माण शुरू होने तक लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इस पर कार्रवाई के नाम पर खाना पूर्ति हो रही है, इसलिए संबंधित प्रधान व कर्मचारियों में कोई खौफ भी दिखाई नहीं दे रहा है।
केस-1
आवास को 25-25 हजार, एफआईआर के आदेश
प्रधानमंत्री आवासों केे आवंटन में हो रहे खेल की बानगी डीएम के गोद लिए गांव बिलगवां की स्थिति से ही स्पष्ट समझी जा सकती है। गांव के मजरा भूड़ा गौटिया निवासी चंद्रपाल सहित कई लोगों ने डीएम को शपथपत्र सहित शिकायत दी है, जिसमें प्रधान व सचिव पर आवास के बदले 25-25 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। इस पर डीएम ने सीडीओ को जांच कराने एवं एफआईआर के आदेश दिए हैं।
केस-2
पक्के मकान फिर भी दिया आवास
आवासों के आवंटन में गड़बड़ी की दूसरी बानगी अमरिया ब्लॉक के गांव करगैना करगैनी व मरौरी ब्लॉक के गांव पिपरिया अगरू में देखी जा सकती है। दोनों गांव में अपात्रों को आवास मिलने की शिकायत पर अलग-अलग अधिकारियों से जांच कराई गई। करगैना करगैनी में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार की जांच में छह लोग क्रमश: फरमूदी बेगम, शहनाज, ताहिरा, रफीकन, हाजरा बेगम और फातिमा अपात्र पाई गईं। जिसमें प्रथम तीन के पक्के आवास बने हैं, जबकि तीन को पहले इंदिरा आवास मिल चुके हैं। इसी प्रकार पिपरिया अगरू में जसवंत कुमार व सुखलाल के पक्के मकान होने के बाद भी आवास आवंटित होना पाया गया।
गरीब तो माना लेकिन सूची में नाम नहीं
प्रधानमंत्री आवास योजना में पूर्व में तैयार पात्रता सूची में भी घालमेल है। गांव गाजीपुर मुगल के शिवराज की पत्नी सावित्री देवी ने सचिव पर रुपये लेने के बाद भी आवास न देने की शिकायत की। इसकी जांच में पाया गया कि शिवराज गरीब है, लेकिन 2011 में बनी आर्थिक गणना की पात्रता सूची में उसका नाम न होने के चलते उसे आवास नहीं दिया जा सकता।
प्रधानमंत्री आवास चयन में प्रधान और सचिव को कोई विशेष अधिकार नहीं है। यदि किसी से धनराशि मांगी जाती है वह सीधे शिकायत कर सकता है। इस पर संबंधित के खिलाफ सीधे एफआईआर कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डा. दिनेश कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी