पीलीभीत। जिले में किशोरियों को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए शुरू किया गया सर्वाइकल वैक्सीन का टीकाकरण अभियान शुरू से ही सुस्त चाल के चलते पिछड़ गया। निगरानी में लापरवाही, विभागीय खानापूरी के चलते जिले में 15 जून की रिपोर्ट के आधार पर सिर्फ तीन प्रतिशत ही वैक्सीन स्कूली छात्राओं को लगाई जा चुकी हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि जिस महंगी वैक्सीन की उपलब्धता शुरू करने में स्वास्थ्य विभाग को महीनों बीत गए, उसकी उपलब्धता होने के बाद भी टीकाकरण में विभाग पीछे क्यों रह गया।
सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों को भविष्य में बचाया जा सके, इसके लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान 24 मार्च से शुरू हुआ। 24 मार्च से 15 जून तक की लगभग तीन माह की रिपोर्ट में अब सर्वाइकल वैक्सीन की स्थिति जिले में बेहद ही खराब रही। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित 24,624 किशोरियों में से महज 774 को ही वैक्सीन लग पाई, जो कि कुल लक्ष्य का केवल 3.1 प्रतिशत ही है। जागरूकता की कमी के चलते प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी इसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया।
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आरोग्य मेले में नहीं लगती वैक्सीन
मुख्यमंत्री जन आरोग्य में पहुंचने वाली किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने के निर्देश दिए गए। लेकिन, यहां भी निगरानी न होने के चलते वैक्सीन नहीं लगाई गई। वहीं, एएनसी दिवस सहित आशा कार्यकर्ता, आरबीएसके टीम को भी वैक्सीन लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, धरातल पर कुछ असर नहीं दिखा।
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राज्यपाल के अभियान को नहीं मिली गति
जिले में दौरे पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कलीनगर क्षेत्र के एक कार्यक्रम में जिले में सर्वाइकल वैक्सीन की शुरुआत की थी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से दस वैक्सीन किशोरियों को लगाए गए थे। इसके बाद जिले में सर्वाइकल वैक्सीन किशोरियों को लगाने में लंबा समय लगा। लेकिन, रिपोर्ट के अनुसार अभियान को पलीता लगता नजर आ रहा है।
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वर्जन
सर्वाइकल वैक्सीन के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर अभियान चलाया जा रहा है। अभिभावकों को उनकी बेटियों को सर्वाइकल वैक्सीन लगाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। - सीबी पंत, मुख्य चिकित्साधिकारी