कलीनगर। गोमती नदी की अविरल धारा बहाने के साथ उद्गम स्थल को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के प्रयासों ने फिर तेजी पकड़ी है। डीएम के निर्देश पर रविवार को डीडीओ, एसडीएम, डीपीआरओ समेत सिंचाई विभाग के अफसरों ने उद्गम स्थल पहुंचकर स्थिति को परखा। अविरल धारा के साथ गोमती उद्गम स्थल के विकास को लेकर संभावनाएं तलाशी।
गोमती नदी का उद्गम स्थल माधोटांडा में है। देखरेख के अभाव में कई सालों से गोमती नदी की धारा अविरल नहीं हो सकी। उद्गम स्थल के बाद गोमती का प्रवाह नजर नहीं आता। कई स्थानों पर नदी राजस्व अभिलेखों से ही गायब हो चुकी है। डीएम पुलकित खरे के समय में उद्गम स्थल से लेकर जनपद सीमा तक गोमती नदी की खोदाई कर धारा बहाने के प्रयास किए गए, लेकिन उनके जाने के बाद स्थिति फिर खराब हो गई। गोमती उद्गम स्थल पर हुए विकास कार्य भी पुराने हो गए। लाइटें टूट गईं, कैंटीन बंद हो गई। इससे पर्यटन के लिहाज से आने वाले लोगों की संख्या भी कम हो गई। इसको लेकर पूर्व में प्रयास फिर शुरू हुए। केंद्र से जलशक्ति मंत्रालय की टीम भी पहुंची।
उधर, डीएम संजय कुमार सिंह ने निर्देश पर रविवार को जिला विकास अधिकारी संजय कुमार यादव, सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार कलीनगर वीरेंद्र कुमार, डीपीआरओ रोहित भारती के अलावा पीडब्ल्यूडी, जल निगम के अफसर भी गोमती उद्गम स्थल पर पहुंचे। ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठकर कर मंथन किया।
टीम ने उद्गम स्थल और फिर माधोटांडा-पूरनपुर मार्ग तक अविरल धारा के प्रवाह के लिए स्थिति परखी। इसके अलावा गोमती को जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने के साथ डिवाइडर युक्त बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के जेई को निर्देश दिए। गंदे नालों के पानी को रोकने के लिए प्रस्तावित एसटीपी के क्षेत्र का भी जायजा लिया। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्य योगेश्वर सिंह, निर्भय सिंह, प्रधान नईम अली, महिपाल सिंह, श्रीराम कश्यप, राधे कश्यप आदि मौजूद रहे।