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स्वास्थ्य की परियोजनाओं को अफसरों की सुस्ती ने बना दिया %बीमार%

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जिला अस्पताल स्थित ब्लड सेपरेशन यूनिट। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों की परियोजनाएं स्वीकृत हैं लेकिन जिले का दुर्भाग्य है कि आम जनता को इनका लाभ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसमें मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजनाएं भी शामिल हैं। अफसरों की सुस्ती के चलते कुछ परियोजनाएं अधर में लटकी हैं तो कुछ बहुत धीमी गति से चल रही हैं।
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बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं की बात करें तो शहर से करीब दस किलोमीटर दूर पूरनपुर रोड स्थित खाग में राजकीय मेडिकल कॉलेज बन रहा है। ललौरीखेड़ा के कुकरीखेड़ा में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया जा रहा है और जिला अस्पताल परिसर में ब्लड सेपरेशन यूनिट बनाई जा रही है। मेडिकल कॉलेज का काम बहुत धीमा चल रहा है। बाकी दो परियोजनाओं का कार्य पिछले साल ही पूरा होना था जो अभी तक नहीं हुआ। आम जनता को इनका लाभ लेने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेेगा।
परियोजना एक : दस साल में नहीं बन सकी ब्लड सेपरेशन यूनिट
जिला अस्पताल में सितंबर 2012 में ब्लड सेपरेशन यूनिट बनाने का प्रस्ताव शासन में मंजूर हुआ था। शासन से बजट भी जारी हो गया। कोरोना काल में कार्य ठप रहा। उसके बद ठेकेदार ने कार्य बंद कर दिया। दस साल इसी उठापटक में गुजर गए लेकिन यूनिट का कार्य पूरा नहीं हो सका। पिछले साल इसे शुरू किया जाना था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। हालांकि भवन तैयार हो गया है, लेकिन फिनिशिंग कार्य अधूरे हैं। अभी तक न उपकरण आए और न ही लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी हुई। स्टाफ की ट्रेनिंग भी बाकी है। इसको शुरू होने में करीब तीन महीने का वक्त लग सकता है। यूनिट शुरू होने से सबसे ज्यादा फायदा डेंगू के मरीजों या उन मरीजों को जिनको खून के किसी खास अवयव की जरूरत होती है। इस यूनिट में रक्त से लाल रुधिर कोशिका, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट जैसे अवयव अलग किए क यूनिट 3 से 4 लोगों की जरूरत पूरी कर सकती है।
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परियोजना दो : एक साल पहले पूरा होना था कुकरीखेड़ा पीएचसी का कार्य
ललौरीखेड़ा के कुकरीखेड़ा में 2019 में 2.41 करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की परियोजना की मंजूरी मिली थी। आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को इसका लाभ मिलता। मार्च 2021 में इसका कार्य पूरा होना था लेकिन आलम ये है कि एक साल बाद भी 85 फीसदी कार्य हो सका है। अप्रैल तक 67 फीसदी ही कार्य हुुआ था। बजट भी समय पर न मिलना एक बड़ा कारण रहा।
परियोजना तीन : राजकीय मेडिकल कॉलेज का कार्य भी 22 फीसदी हो सका
खाग में 254 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा राजकीय मेडिकल का कार्य मई तक 22 फीसदी पूरा हुुआ है। जबकि अगले शैक्षिक सत्र से मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं संचालित करने की योजना है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस परियोजना की मंजूरी दिसंबर 2020 में मिली थी। अप्रैल तक महज 18 फीसदी कार्य हुआ। उसके बाद मई में 22 फीसदी कार्य पहुंचा। अफसर ही मान रहे हैं कि राजकीय कॉलेज का कार्य पीछे चल रहा है। इसी साल अक्तूबर तक कार्य पूरा होना है। अगर कार्य इसी सुस्ती से चला तो तय समय पर कार्य पूरा होना मुश्किल है। मेडिकल कॉलेज बनने से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बहुत बेहतर हो जाएंगी। कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। जिला अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कॉलेज बनने से आईसीयू की सुविधा भी मिल जाएगी। तमाम तरह की जांच अपने जिले में हो सकेंगी।
परियोजनाओं को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। समय पर कार्य पूरा हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य समय से पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है।-पुलकित खरे, डीएम
ब्लड सेपरेशन यूनिट बनने की समयावधि निकल गई है। बीच में काम बंद होने से निर्माण प्रक्रिया रुकी। अब फिलहाल तेजी से काम कराया जा रहा है। ताकि यूनिट जल्द शुरू कराई जा सके। -डॉ. आलोक शर्मा, सीएमओ

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज। फाइल- फोटो : PILIBHIT

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