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अब क्षयरोगियों को छह की जगह खानी होगी एक गोली

Mon, 30 Oct 2017 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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टीबी - फोटो : अमर उजाला
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सीएमओ ने डेली रेजिमेन कार्यक्रम का किया शुभारंभ
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आशाओं के माध्यम से मरीजों तक पहुंचेगी नई दवा
टीबी या तपेदिक के मरीजों को आधा दर्जन गोलियों की भारी भरकम डोज के जगह सिर्फ एक गोली ही खानी होगी। स्वास्थ्य महकमे ने क्षय रोग के खात्मे को अब डेली रेजिमेन (क्षय निरोधी औषधि) प्रोग्राम शुरू किया है। सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने सोमवार को मरीजों को दवा वितरित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
जिले में पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सोमवार से डेली रेजिमेन कार्यक्रम की शुरूआत कर दी गई। जिला क्षय रोग अस्पताल में सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने मरीजों को दवा वितरित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि अब क्षय रोगियों को दवाओं की भारी भरकम खुराक नहीं खानी होगी। अब एक ही गोली से आधा दर्जन दवाओं की कमी पूरी की जाएगी। मरीज दवा लेने में कोताही न बरतें। स्वास्थ्य कर्मी भी दवा वितरण पर खासी नजर रखें। लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। उन्होंने जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट से दवा के वितरण के बाबत जानकारी की। इस दौरान आरएनटीसी के कर्मचारियों को मरीजों के संख्या के अनुसार डेली रेजिमेन का वितरण किया गया। इस मौके पर एचएन सिंह, सुपरवाइजर ठाकुरदास, गोविंदराम, श्वेतांक, लैब टेक्नीशियन रामनरेश, अतुल मिश्रा, अनुराग, को-आर्डिनेटर नियति उपाध्याय, संजीव, सलिल, राजेंद्र कुमार आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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यह है डेली रेजिमेन
वर्ष 2035 तक तपेदिक या टीबी को पोलियो की तरह जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने मरीजों को नई दवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। क्लीनिकल ट्रायल सहित सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद इसे राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण प्रोग्राम में शामिल किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट ने बताया कि टीबी मरीजों के लिए यह दवा बेहद कारगर सिद्ध होगी। पूर्व में बीमारी के लक्षण मिलने पर मरीजों को आधा दर्जन से अधिक गोलियां खानी पड़ती थी। एक भी दवा खाने में मरीज ने चूक की तो वह गंभीर टीवी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) का शिकार हो जाता है। क्षय रोग को जड़ से खात्मे के लिए अब डेली रेजिमेन का प्रयोग किया जाएगा। अब मरीज को वजन के अनुसार गोलियां खानी होगी। इस दवा का वितरण आशाओं के माध्यम से किया जाएगा। इसको लेकर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसकी ऑनलाइन मानीटरिंग भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह दवा बैक्टीरिया के सेल वॉल में बनने वाले मायकोलिक एसिड के उत्पादन को कम करती है। जिससे बैक्टीरिया कमजोर होकर मर जाता है और अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाता है। 
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