पीलीभीत। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का कहर इंसानों पर टूट रहा है तो वहीं दूसरी तरफ जानवरों में खुरपका-मुंहपका वायरस के नए वैरिएंट के हमले का अंदेशा है। पंद्रह दिन में सिर्फ घुंघचाई व पूरनपुर क्षेत्र में 500 से अधिक पशुओं की मौत हुई है। हजारों पशु वायरस की चपेट में है। अचानक हुई मौतों से पशु पालक डरे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग वायरस के नए वैरिएंट के अंदेशे पर जांच में जुट गया है। सैंपल आईवीआरआई बरेली को भेजे गए हैं।
जो पशु 15 दिन के भीतर मरे हैं, उनके पशु पालकों ने बताया कि तेज बुखार के बाद पशु चलने फिरने में लाचार हो जाते हैं। जीभ में छाले पड़ जाते हैं और चारा भी नहीं खा पाते हैं। पशु चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर गाय-बैल ही खुरपका और मुंहपका की चपेट में आते थे लेकिन पहली बार ऐसा देखा गया है कि बड़ी संख्या में भैंस भी चपेट में आईं हैं। माना जा रहा है कि पहले से चले आ रहे खुरपका और मुंहपका के वायरस से ज्यादा ताकतवर है। इस वायरस के बारे में जांच से ही कुछ खुलासा होने की उम्मीद की जा रही है। दो तीन दिन में जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है। खुरपका और मुंहपका वायरस का यह नया वैरिएंट हो सकता है। फिलहाल एकाएक इतनी मौतें होने से किसान परेशान हैं। घुंघचाई, शाहगढ़ और पूरनपुर क्षेत्र में जहां पशुओं मौतें हो रही हैं वह इलाका टाइगर रिजर्व से करीब है। टाइगर रिजर्व सीमाक्षेत्र से सटे गांव इस वायरस प्रभावित हैं। वहां पशुओं की मौत हुई है। घुंघचाई क्षेत्र के पशुधन प्रसार अधिकारी डा. शुभेंदू प्रियदर्शनी का कहना है कि मांसाहारी जानवरों को खतरा नहीं है। लेकिन जो शाकाहारी जानवर हैं जिसमें नीलगाय व अन्य शाकाहारी जीव इसकी चपेट में आ सकते हैं।
गाय-बैल पहले मुंहपका और खुरपका से मरते थे पर इस वायरस के हमले में भैंस भी मर रहीं हैं। यह पहली बार देखने को मिल रहा है। नया वायरस ऐसा है कि 24 घंटे में मौत होती है लेकिन अगर पशु ताकतवर है एक से पांच दिन के भीतर उसकी मौत हो जाती है। इसीलिए सैंपल भेजे गए हैं ताकि जांच हो सके।
- डॉ. शुभेंद्रू प्रियदर्शनी, पशुधन प्रसार अधिकारी घुंघचाई
पूरनपुर में तीन दिन में 35 जानवर मरे
पूरनपुर क्षेत्र के गांवों में भी पंद्रह दिनों से खुरपका-मुंहपका का वायरस कहर मचा रहा है। तीन दिन में ही 35 जानवरों की मौत हो गई। एक हजार से ज्यादा जानवर इसकी चपेट में आ गए हैं। उप-मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव मिश्रा का कहना कि पिछले कुछ दिनों से तेजी से मामले आए हैं। बात चिंता की है इसलिए आईवीआरआई बरेली सैंपल भेजे गए।
हवा में फैलता है यह वायरस
खुरपका-मुंहपका वायरस हवा में तेजी से फैलता है। अगर कोई जानवर इसके संपर्क में आता है तो वो भी इसकी चपेट में आ जाएगा। डॉ. राजीव मिश्रा ने बताया कि यह वायरस हवा में तेजी से फैलता है।
डेढ़ साल से नहीं हुआ वैक्सीनेशन
पीलीभीत। जानवरों को पिछले डेढ़ साल से खुरपका और मुंहपका से बचाव की वैक्सीन नहीं लगी। पिछले साल जिले में 3.40 लाख डोज आए थे, लेकिन अधोमानक होने के कारण वैक्सीन वापस भेज दी गईं। वैक्सीनेशन ठप हो गया। सिर्फ पूरनपुर को ही 1.15 लाख वैक्सीन की जरूरत है। अब पशु चिकित्सा अधिकारियों ने फिर वैक्सीन मांगी है। ताकि जानवरों को मौत से बचाया जा सके।
जानवरों की मौत हुई है। वायरस का पता लगाने के लिए आईवीआरआई बरेली को सैंपल भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
डॉ. अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
कई गांवों में पशुओं की मौत, डीएम को भेजा गया पत्र
पूरनपुर। पूर्व जिला पंचायत सदस्य अर्चना वर्मा ने डीएम को पत्र भेजा है। गांव अजीतपुर बिल्हा, सिमरिया, घुंघचाई, चंदोखा, जितौरिया गांव में पशुओं की अचानक मौत होने की जानकारी देकर जांच कर कार्रवाई कराने की मांग की है।
इसलिए है नए वैरिएंट का अंदेशा
खुरपका और मुंहपका से गाय, बैल ही मौत का शिकार होते थे। पहली बार भैंस भी बड़ी संख्या में मौत का शिकार हुईं है। इसीलिए नए वायरस का अंदेशा है।