पीलीभीत। क्या कोरोना वायरस अन्य वायरस की तरह हमारे वातावरण में स्थापित हो गया है जो किसी को कभी भी हो सकता है, जैसे सामान्य सर्दी, बुखार, जुकाम। जवाब है शायद हो सकता है। क्योंकि पिछले दिनों जो नए केस मिले हैं उनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। उसके बावजूद वह कोरोना संक्रमित हुए। विभागीय अधिकारी भी इसे लेकर उलझन में हैं और वजह को लेकर ट्रेसिंग चल रही है।
तीसरी लहर ने जिले में नए साल के पहले दिन ही दस्तक दी थी। उसके बाद मरीज बढ़े और एक जनवरी और फरवरी शुरू में ऐसा वक्त आया कि एक-एक दिन में सौ से ज्यादा केस मिलने लगे। उन केसों में एक सामान्य बात थी कि वह किसी न किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए थे। तमाम लोग ऐसे थे जो दिल्ली या बाहर से आए हैं। फरवरी के बाद से केस मिलना बंद हो गए। इस दौरान कुल 1906 केस मिले। अभी एक सप्ताह के भीतर पांच नए केस मिल चुके हैं। दो केस शुक्रवार को मिले। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। इसका कारण है कि जिन लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है वह न तो बाहर से आए और न ही किसी बाहर से आने वाले व्यक्ति के संपर्क में पहुंचे। अब सवाल उठता है कि अचानक वायरस उनमें कहां से पहुंचा। न्यूरिया के रहने वाले पिता-पुत्र, पूरनपुर की एक गर्भवती महिला, इसके अलावा जिला अस्पताल में दो केस मिले। एक अन्य बाहर का है जो पोर्टल पर दर्ज है। इनमें चार केस ऐसे हैं जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। सीएमओ डॉ. आलोक शर्मा कहते हैं कि कोरोना वायरस खत्म नहीं हुआ। महामारी खत्म भी हो जाए तब भी कभीकभार कोरोना के केस आते रहेंगे। ये मानकर चलिए कि ये वारयस बाकी बीमारियों की तरह हमारे इर्द-गिर्द रहने वाला है। जैसे सामान्य सर्दी जुकाम से बचने के लिए एहतियात बरतना है ठीक उसी तरह इस वायरस से बचना है। इसके लिए जरूरी है सभी कोरोना वैक्सीन लगवाएं। उन्होंने बताया कि छह जून से टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को वैक्सीन लगाएगी।
जिला अस्पताल की लैब में बढ़ गई सैंपलों की जांच
कोरोना के नए केस मिलने के बाद जिला स्तर पर सैंपलों की जांच बढ़ा दी गई है। प्रतिदिन करीब सात सौ सैंपल जिला अस्पताल की लैब में आ रहे हैं। हालांकि एक मशीन होने से जांच उतनी रफ्तार से नहीं हो पा रही है। लैब सहायकों का कहना कि कुछ दिन से जांच सैंपल बढ़ाए गए हैं।