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शहर के नाले चोक ही रहते हैं जबकि इन पर हर साल नोट ‘बहते’ हैं

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पीलीभीत। कमीशन के गणित ने तीन नगरपालिका और छह नगर पंचायतों में नालों की सफाई की हालत बद से बदतर कर रखी है। नगरपालिका और नगर पंचायतों में वर्षों से चोक नालों को साफ करने के नाम पर हर साल करोड़ों खर्च हो जाते हैं, मगर उनमें से गंदे पानी की निकासी न होने से हर साल बरसात में तमाम मोहल्ले तालाब बन जाते हैं। नाले हमेशा चोक ही रहते हैं जबकि हर साल इनकी सफाई के नाम पर नोट ‘बहते’ हैं।
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मानसूनी बारिश में हर साल शहर और कस्बों के प्रमुख इलाकों में बड़ी आबादी बाढ़ जैसा संकट झेलती है। बरसात से पहले बातों और वादों का मौसम आता है। ये वादे होते हैं तलीझाड़ नाला सफाई के। फिर जब बरसात शुरू होती है तो ये वादे भी बरसात की बाढ़ में डूब जाते हैं। इस बार भी हालात यही सब होने की गारंटी दे रहे हैं। मानसून आने से पहले ही शहर के अलावा पूरनपुर और बीसलपुर नगर पंचायतों में नाला सफाई के नाम पर केवल खानापूरी की गई।
सूत्रों के अनुसार तीनों नगरपालिका और छह नगर पंचायतों में शासन से आया बजट रिलीज कराने के लिए छह प्रतिशत ऊपर तक पहुंचाने पड़े। अब उसमें से जो बचा, उसमें नीचे वालों का कमीशन। फिर ठेकेदार का अपना फायदा। उसके बाद जो बचेगा, उसमें नाला सफाई कराई जा रही है। कमीशनखोरी के चलते नगरपालिका के ठेकेदार नाला सफाई में निर्धारित मानकों का खिलवाड़ हर साल करते हैं। एक सप्ताह पूर्व डीएम भी कुछ नालों की सफाई ठीक ढंग से न होने पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। डीएम ने कहा था कि बड़े और छोटे नालों की सफाई तलीझाड़ होनी चाहिए। इसके बाद भी ठेकेदार ने नाले की सफाई ठीक ढंग से नहीं कराई। नगरपालिका के अफसरों की तरफ से भी निर्देश जारी करने का काम बराबर हो रहा है। फिर भी नाले साफ नहीं हुए हैं। सांठगांठ के चलते ठेकेदार किसी की सुनते ही नहीं हैं। अब मानसून भी दस्तक दे चुका है। जिस दिन भी अधिक बारिश होगी समझ लो की नाले फिर से ओवरफ्लो हो जाएंगे। आम लोगों को हर साल की तरह इस बार भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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नाले में भरा पड़ा है मलवा
शहर के लाल रोड पर स्थित मोहल्ला वशीर खां के समीप दो दिन पूर्व ही नाले की सफाई की गई थी। फिलहाल, वर्तमान में इस नाले की स्थिति यह है कि यहां देखकर नहीं लगता है कि नाले की सफाई भी हुई है। नाले की एक तरफ की दीवार टूटी पड़ी है और साथ में बाहर से लाकर डाला गया मलवा भी उसमें पड़ा है। उसमें से निकली गंदगी के ढेर भी वहीं लगे हैं। पुलिया के नीचे कूड़े का ढेर लगा है। यह बरसात में यहां रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन सकता है।
डीएम की फटकार भी बेअसर गई
मोहल्ला नखासा का नाला भी गंदगी से पटा है। इलाके के लोगों का कहना है कि कई साल से नाले की अच्छी तरह सफाई नहीं हुई है। नगरपालिका के ठेकेदार के सफाई कर्मी कभी नाला साफ करने आते भी हैं तो सिर्फ ऊपर ही सफाई की खानापूरी करके लौट जाते हैं। इससे ज्यादा सफाई कभी नहीं होती। इतनी सफाई से नाले में पानी का बहाव जरा भी तेज नहीं होता। एक सप्ताह पूर्व डीएम ने निरीक्षण के दौरान सफाई कर्मियों को फटकार लगाकर नाले की सफाई दोबारा कराने के निर्देश दिए थे। मगर, ठेकेदार पर इसका असर नहीं पड़ा। अब तक नाले की ठीक ढंग से सफाई नहीं हुई।
सफाई के बाद भी गंदगी के ढेर
बीसलपुर नगरपालिका के अनुसार बरसात से पहले समस्त नालों की तलीझाड़ सफाई हो चुकी है। लेकिन हकीकत इसके परे है। रोडवेज बस स्टैंड के पीछे नाले की सफाई के नाम पर खिलवाड़ किया गया। यहां नाले में अभी गंदगी के ढेर के साथ झाड़ियां खड़ी हुई हैे। तलीझाड़ सफाई न होने के कारण नाला चोक है। नाला सफाई की हकीकत यह है कि एक सभासद को भी यह बताने के लिए नाले में उतरना पड़ा कि देखो कितनी सिल्ट जमा है। फिर भी सफाई के नाम पर सिर्फ बजट ही ठिकाने लगाया गया। बरसात होने पर आसपास के लोगों को दिक्कत होना तय है।
बजट डकार गए, सफाई नहीं कराई
नगरपालिका प्रशासन ने नाले की सफाई के लिए आए बजट में से अधिकांश बजट हड़प लिया है। नालों की सफाई कराने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। -अशोक शुक्ला, मोहल्ला शिवाजी नगर
नाला सफाई बेहतर तरीके से नहीं हुई
नालों की सफाई ढंग से नहीं हुई है। अब बारिश का मौसम शुरू हो चुका है तो कोई सुधार होना भी मुश्किल है। इससे बारिश में दिक्कत बढ़ जाएगी। नगरपालिका ने नाला सफाई ठीक से कराई होती तो यह परेशानी बरसात में नहीं होती। -मनोज दीक्षित, मोहल्ला दुबे
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