बीसलपुर। एक सैनिक बेटे को खो चुकीं लज्जावती की आंखों में आज भी उसकी यादें बसी हैं। जिक्र छिड़ते ही आंसू निकल पड़ते हैं, लेकिन उसकी शहादत पर उन्हें गर्व भी है। वह अपने छोटे बेटे को भी सैनिक बनाकर देश की सेवा के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। मां की प्रेरणा से छोटा बेटा ऋषि कुमार फौज में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है।
तहसील क्षेत्र के गांव अमरा करोड़ में शहीद सैनिक विनोद कुमार की प्रतिमा स्थापित है। वह शहीद स्तंभ ही विनोद कुमार की यादों को ताजा बनाए हुए है। लज्जावती कहती हैं कि बड़ा बेटा विनोद कुमार बचपन से ही सैनिक बनने की बात करता था। पिता राम आसरे को जब होमगार्ड की वर्दी में देखता तो यही कहता था कि वह फौज में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा करेगा। फौज में भर्ती होने का उसका सपना वर्ष 2009 में पूरा हो गया। सेना में नौकरी के दौरान बेटे से कम ही संपर्क हो पाता था। साल भर बाद कुछ दिन की छुट्टी मिलने पर वह गांव आता।
लज्जावती को याद है, राजस्थान के अलवर में तैनाती के दौरान 13 जून 2011 को बेटा शहीद हो गया था। अगले दिन सेना के अधिकारी विनोद का शव लेकर गांव में आए थे। उस समय पूूरा गांव सम्मान में उमड़ पड़ा था। राजकीय सम्मान के साथ बेटे के पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया गया था। उसके बाद गांव में शहीद सैनिक विनोद की प्रतिमा स्थापित की गई।
प्रत्येक परिवार को एक युवक को फौज में सेवा देनी चाहिए
लज्जावती बताती हैं कि बड़े बेटे के शहीद होने का दर्द आज भी उनके जेहन में हैं, लेकिन फिर भी वह अपने छोटे पुत्र ऋषि कुमार को भी सेना में जाने के लिए लगातार प्रोत्साहित करती हैं। गांव में उनके परिवार को काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। लज्जावती कहती हैं कि प्रत्येक परिवार से कम से कम एक युवक को फौज में अपनी सेवाएं देनी चाहिए।
हैंडपंप लगवाने के लिए चक्कर काटने का मलाल
लज्जावती कहती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। अब तो उनके पति 30 अप्रैल को होमगार्ड की नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परिवार की रोजी- रोटी का साधन केवल कुछ जमीन है। उन्हें इस बात का काफी मलाल है कि अपने मकान के निकट इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाने के लिए अधिकारियों के काफी चक्कर लगाने के बावजूद उनकी यह छोटी सी मांग अब पूरी नहीं हो पाई है। संवाद
विनोद का फाइल फोटो