पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय में करोड़ों रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्सी को लेकर अब ऐसे कई तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे यह मामला केवल सरकारी धन के गबन तक सीमित नहीं दिख रहा।
वर्षों तक डीआईओएस कार्यालय में बाबू का कार्य करने वाले इल्हाम ने कार्यालय में ऐसी पकड़ बना ली थी कि अधिकांश शिक्षक, प्रधानाचार्य, प्रबंधक और विद्यालयों से जुड़े लोग अपने छोटे-बड़े कार्यों के लिए सीधे उसी पर निर्भर रहने लगे थे। आरोप हैं कि नियुक्ति, वेतन, सेवा पुस्तिका, एरियर, अभिलेखों के निस्तारण और अन्य कार्यालयी कार्यों के लिए तय रकम ली जाती थी।
बीसलपुर स्थित जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात इल्हाम उर रहमान शम्सी वर्ष 2018 से लगातार जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में बाबू का काम देख रहा था। नियमों के विपरीत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हाथों में वर्षों तक महत्वपूर्ण कार्यालयी कार्य रहने को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे, लेकिन शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ। धीरे-धीरे उसकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनने लगी, जिसके माध्यम से कार्यालय के अधिकांश काम कराए जाते थे।
सूत्रों के मुताबिक कार्यालय की कई महत्वपूर्ण पत्रावलियां, वेतन संबंधी अभिलेख और अन्य संवेदनशील फाइलें भी लंबे समय तक उसी के पास रहती थीं।
आरोप हैं कि कई मामलों में सीधे नहीं बल्कि बिचौलियों के माध्यम से रकम तय होती थी और उसके बाद संबंधित फाइलों पर कार्रवाई आगे बढ़ती थी।