पीलीभीत में एक ही परिवार के चार लोगों की जघन्य हत्या के मामले में स्पेशल जज राजीव सिंह ने सोमवार को फैसला सुनाया। तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों को 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भरने का आदेश दिया। इस हत्याकांड का एक आरोपी सोमवार को अदालत में हाजिर नहीं हुआ। अब उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।
शहर कोतवाली में 24 अगस्त 1974 को तड़के टीकमदास चांदवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार रात को वह छत पर सोया था। परिवार में पत्नी गंगा देवी, पुत्र प्रभुदास, पुत्री पुष्पा देवी और छोटी पुत्री रानू नीचे सो रहे थे। रात को लोहे के गेट का ताला डुप्लीकेट चाबी से खोलकर कुछ लोग घर में घुस गए। परिवार के चारों सदस्यों की हत्या कर तिजोरी खोलकर 33,200 रुपये के जेवरात और घड़ी ले गए। मकान में एक चाकू व छुरी छोड़ गए। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की।
विवेचना में पाया गया कि टीकमदास चांदवानी का चरित्र सही नहीं था। उसने अवैध संबंधों में बाधक होने के कारण अपने परिवार के चार सदस्यों का हत्या कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नगर निवासी डॉ. असरार साकिब, बरेली जिला के थाना बिसारतगंज निवासी रईस मियां, इसी थाना क्षेत्र के मुशरफपुर निवासी हीरालाल, ग्राम चौबारी थाना कैंट बरेली निवासी सुरेश सिंह और रमेश सिंह, थाना भुता के बेबुलबसंतपुर निवासी सुखपाल सिंह और मुकदमे के वादी टीकमदास चांदवानी को हत्या और हत्या की साजिश का दोषी पाकर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान डॉ. असरार साकिब, रईस मियां और सुखपाल की मौत हो गई। इन तीनों के विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
सरकारी वकील मनोज मिश्रा ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से नौ गवाह पेश हुए। सोमवार को स्पेशल जज राजीव सिंह ने फैसला सुनाया। आरोपी हीरालाल, सुरेश सिंह व रमेश सिंह को हत्या और साजिश का दोषी पाकर आजीवन कारावास और प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये के दंड से दंडित किया है। टीकमदास चांदवानी सोमवार को अदालत में पेश नहीं हुआ। उसका गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।