पूरनपुर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि लखीमपुर की घटना बेहद दुखद है। सरकार आंदोलनकारियों को झगड़े में उलझाना चाहती है। मगर इससे डरने की जरूरत नहीं है। सरकारी चक्रव्यूह से बचे रहने की जरूरत है। आंदोलन जारी रहेगा और अंत में किसानों की ही जीत होगी। उन्होंने पूरनपुर में रात्रि 12.20 बजे आंदोलनकारियों से घर जाने के लिए कहा। मगर किसान नहीं माने। लखीमपुर का आंदोलन खत्म होने की जानकारी के बाद भी सड़क पर डटे रहे। अधिकारियों ने मनाया तब सोमवार को शाम चार बजे धरना-प्रदर्शन खत्म हुआ। इसके चलते 22 घंटे तक असम हाईवे जाम रहा। आवागमन बाधित हुआ।
लखीमपुर खीरी की घटना के विरोध में रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे किसानों ने असम हाईवे के बंडा चौराहा, खुटार चौराह, कढेरचौरा, कजरीनिरंजनपुर में हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। देर रात को खुटार चौराहा पर धरना प्रदर्शन कर रहे किसान बंडा चौराहा पर पहुंचकर धरना स्थल में शामिल हो गए। अन्य स्थानों पर आधी रात तक धरना प्रदर्शन चलता रहा। बंडा चौराहा पर आधी रात को पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने धरना स्थल को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों को चक्रव्यूह में फंसना चाहती है। झगड़ा कराना चाहती है। मगर झगड़ा से हम लोगों को दूर रहना है। लखीमपुर की घटना दुखद है। मगर ऐसी घटनाओं से प्रदर्शनकारी विचलित होने वाले नहीं है। डरने की जरूरत नहीं है। धरना प्रदर्शन को आगे बढ़ते रहे। अगर दिल्ली बॉर्डर पर कोई धरना स्थल में शामिल होने जा रहा है। तब उसकी मदद करें। सरकार कितना भी प्रयास क्यों न कर ले। मगर आखिर में जीत किसानों की होनी है। धरना स्थल को भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर जादौन आदि ने संबोधित किया। टिकैत ने प्रदर्शनकारियों को घर जाने की बात कहकर लखीमपुर को चले गए। मगर इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पूरी रात धरना स्थल पर जमकर लखीमपुर में होने वाले निर्णय का इंतजार करते रहे। सोमवार को लखीमपुर में वार्ता के बाद आंदोलन समाप्त होने के बाद भी सोमवार शाम चार बजे तक जाम लगाकर प्रदर्शन होता रहा। बाद में संयुक्त किसान मोर्चा के लखीमपुर की घटना को लेकर लिए गए निर्णय का हवाला देकर धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।