पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी लाइन।संवाद
पीलीभीत। दिवाली को लेकर दुकानों पर तेज ध्वनि के पटाखों के साथ ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी की बिक्री शुरू हो गई है। लोग तेज आवाज के पटाखों को पसंद कर रहे हैं। ऐसे में यह ध्वनि कानों को नुकसान पहुंचा सकती है।
आतिशबाजी करते समय काफी सावधान रहने की जरूरत है। जरूरी है कि दिवाली पर तेज आवाज वाले बम-पटाखे न फोड़ें, इससे ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है,, साथ ही कान का पर्दा फटने का डर भी बना रहता है। बहुत ज्यादा पटाखे भी न फोड़ें, क्योंकि इसका धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ ही किसी दमा व एलर्जी वाले मरीज के लिए घातक है।
जिला अस्पताल के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डाॅ. शलिनी त्रिपाठी ने बताया कि तेज आवाज वाले बम-पटाखों से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण फैलता हैय यह कानों के लिए भी नुकसानदायक है। 20 से 30 हजार डेसीबल की तीव्रता तक की आवाज ही कान सहन कर सकता है। इससे अधिक तेज आवाज नुकसान दायक है।
अधिक तेज आवाज होने से कान का पर्दा भी फट सकता है। कई बार इसका कान की हड्डियों पर भी फर्क पड़ता है। उन्होंने बताया कि अगर कान में घंटी बजे, कुछ देर तक कुछ सुनाई न दे तो इसका मतलब है कि पटाखा या बम अधिक तीव्रता का था। ऐसे में पटाखे बजाते समय कानों में कार्टन लगाएं। जिससे उसकी ध्वनि कम लगे।