जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा की आरती और भाजपा (मेनका गुट) की आशा देवी में फिर मुकाबला देखने को मिलेगा। इससे पूर्व दोनों उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य पद के लिए वार्ड नंबर 26 पर आमने-सामने चुनाव लड़ चुकी हैं। जिसमें विधायक पीतमराम की पुत्र वधू आरती देवी को आशा ने हरा दिया था।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शुक्रवार को तीन नामांकन पत्र दाखिल किए गए। जिसमें सपा से दो और भाजपा की ओर से एक नामांकन हुआ है। इसमें सपा की ओर से विधायक पीतमराम की पुत्र वधू आरती देवी व उनके भाई मोतीराम की पत्नी मालती का नामांकन हुआ। इसमें मालती देवी को डमी प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो यदि दोनों नामांकन पत्र वैध पाए गए तो मालती देवी चार जनवरी अपना नाम वापस ले सकती हैं। इससे अध्यक्ष पद की दौड़ में सपा की आरती और भाजपा की आशा देवी के बीच सीधी टक्कर के आसार बन गए हैं। दोनों प्रत्याशियों के आमने-सामने से होने से जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की तस्वीर फिर लोगों के दिलो दिमाग पर ताजा हो गई है।
दरअसल जिला पंचायत के वार्ड 26 से पूरनपुर विधायक पीतमराम की पुत्रवधू आरती और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के प्रतिनिधि मलखान सिंह की पत्नी आशा देवी ने चुनाव लड़ा था। आशा के सामने आने पर विधायक पीतमराम ने स्थिति बिगड़ते देख अपने विधानसभा क्षेत्र पूरनपुर में वार्ड छह से भी आरती देवी का नामांकन करा दिया था। आशा देवी ने आरती को करीब 150 वोटों से शिकस्त देकर सदस्य का चुनाव जीत लिया था। वार्ड छह से चुनाव जीतकर आरती अब फिर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में आ गईं हैं।
दोनों प्रत्याशियों ने नहीं लिखा पति का नाम
जिला पंचायत चुनाव में सपा की प्रबल दावेदार आरती और भाजपा (मेनका गुट) दोनों ही वर्तमान में विवाहित हैं, लेकिन दोनों ने नामांकन पत्र में अपने पति का नाम दर्ज नहीं किया है। 25 वर्षीय आरती देवी ने अपने नाम के आगे पति डॉ. महेंद्र का नाम न लिखकर पिता दाताराम का नाम लिखा है। वही 41 वर्षीय आशा देवी ने पति मलखान सिंह का नाम न लिखकर पिता भोलाराम का नाम दर्ज कराया है। केवल तीसरा नामांकन कराने वाली सपा की डमी प्रत्याशी 39 वर्षीय मालती देवी ने ही पति मोतीराम का नाम दर्ज किया है।