युवक की मौत से नेपाल सीमा पर तनाव, दिनभर जमे रहे अफसर
नेपाल पुलिस की मुठभेड़ पर परिवार ने उठाया सवाल, तनाव के हालात
मामूली कहासुनी में गोली मारने और भारतीय सीमा से शव उठाकर ले जाने का लगाया आरोप
दस साल पहले भी हुई थी घटना
एक साल पहले हुई थी शादी
बनेगा ब्हाट्सएप ग्रुप, संयुक्त गश्त पर जोर
नेपाल पुलिस ने झूठी कहानी रची
भारत-नेपाल सीमा पर पहले भी कई बार दोनों देशों के नागरिकों के बीच मारपीट के बाद तनाव के हालात बनते रहे हैं। पिछले साल सड़क निर्माण को लेकर भी तनाव बन गया था। मगर इस बार शुक्रवार को हुई घटना में भारतीय युवक की गोली मारकर हत्या का आरोप नेपाल पुलिस पर लगा है, जबकि नेपाल पुलिस तस्करी के दौरान मुठभेड़ बता रही है। इसका असर सीमा पर न पड़े, इसे देखते हुए दोनों देशों के अधिकारी दिनभर मंथन करते रहे।
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गुरुवार को हुई घटना के बाद पूरनपुर एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, सीओ लल्लन सिंह पुलिस बल के साथ सीमावर्ती इलाके में पहुंच गए थे। एसएसबी भी अलर्ट हो गई थी। शुक्रवार तड़के डीएम पुलकित खरे, एसपी जयप्रकाश कई थानों की पुलिस और पीएसी के साथ बॉर्डर पर जा पहुंचे। अफसरों ने पहले मृतक के परिवार वालों से बातचीत की।
दोपहर में एडीजी बरेली अविनाश चंद्र भी पहुंच गए। उन्होंने सीमावर्ती इलाके में एक स्थान पर कंचनपुर नेपाल के डीएम-एसपी समेत कई अधिकारियों के संग बैठक की। घंटों चली बैठक के बाद स्थानीय अधिकारियों ने नेपाल के अफसरों द्वारा जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन मिलने की बात कही।
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सीमा पर आवाजाही रही कम, दहशत में रहे लोग
वैसे तो भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाके में आवाजाही दोनों तरफ से रहती है। मगर बृहस्पतिवार को हुई घटना के बाद तनाव जैसा माहौल साफ दिखाई दिया। दोनों तरफ की फोर्स सीमा पर अपने-अपने स्थान पर मुस्तैद रही। सीमा पर कम लोग ही आवाजाही करते नजर आए।
हिरासत में लिए युवकों से पूछताछ, मगर किसी को नहीं जाने दिया पास
नेपाल पुलिस और परिवार की कहानी के बीच घटना में अब भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके। अगर मामला तस्करी का नहीं था तो फिर कहासुनी किस बात पर हुई। इसकी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मृतक गोविंदा और घायल गुरमेज के साथ गए पप्पू सिंह और रेशम सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। उन दोनों से किसी को मिलने नहीं दिया गया। वहीं पूछताछ में क्या बात निकलकर आई, इसे बताने से अफसर बच रहे हैं।
दस साल पहले भी हुई थी घटना
दस साल पहले भी नेपाल बार्डर पर कुछ इसी तरह की घटना हुई थी। टाटरगंज गांव निवासी दो लोगों की नेपाल पुलिस की गोली लगने से मौत हुई थी। उस वक्त भी तनाव के हालात बने थे। नेपाल पुलिस भारतीय सीमा से युवकों के शव उठाकर ले जाने का आरोप लगा था।
एक साल पहले हुई थी शादी
परिवार वालों के अनुसार गोविंदा की शादी एक साल पहले कुलविंदर कौर से हुई थी। वह मजदूरी करता था। उसका एक छोटा भाई सुरजीत सिंह है। मां प्रकाश कौर और 14 साल की बहन रूपा कौर है। गोविंदा की मौत के बाद परिवार में गुस्सा और गम दोनों है। शुक्रवार देर शाम तक शव परिवार वालों को नहीं मिला। उसका पोस्टमार्टम नेपाल के धनगढ़ी में कराया गया है। देर रात तक शव सीमा पर देने की बात तय हुई है। इसे लेकर नेपाल जिले के अधिकारी भी परिवार के साथ पहुंचकर इंतजार करते रहे।
नेपाल पुलिस ने झूठी कहानी रची
मृतक के चाचा गुरदेव सिंह ने बताया कि गोविंदा गांव के ही गुरमेज सिंह, पप्पू सिंह और रेशम सिंह के साथ पिछले 12 दिन से नेपाल सीमा से सटे पिलर संख्या 38 और 39 के बीच काली पुलिया के पास स्थित भीकम सिंह के खेत में गन्ने की छिलाई करने जा रहे थे। घटना के समय आवाजाही के दौरान उनकी नेपाल पुलिस से कहासुनी हो गई थी। कहासुनी के दौरान नेपाल पुलिस ने गोली चला दी। पहली गोली हवा में निकल गई। दूसरी गोली गोविंदा और तीसरी गोली गुरमेज सिंह को लग गई। गोली लगने से गोविंदा वहीं जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। बाकी तीनों युवक मौके से भागकर गांव पहुंचे। तभी घायल गुरमेज ने पूरी घटना बताई थी। नेपाल पुलिस भारतीय सीमा में घुसकर गोविंदा का शव उठाकर ले गई और झूठी कहानी रच दी गई है। हालांकि कहासुनी किस बात पर हुई इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकी है।
एक दिन पूर्व नेपाल पुलिस की गोली लगने से एक युवक की मौत हो गई थी। इस संबंध में नेपाल के कंचनपुर जिले के अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। इसमें घटना की निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिला है। एक ब्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया जाएगा। संयुक्त पेट्रोलिंग भी पहले से बेहतर की जाएगी। परिवार से भी मुलाकात की गई है। हालात पूरी तरह से सामान्य हैं। - अविनाश चंद्र, एडीजी, बरेली