पीलीभीत। जिले के कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। अफसर एक विभाग को संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे का काम भगवान भरोसे हैं। इसका असर विकास योजनाओं की प्रगति पर पड़ रहा है। काम भी प्रभावित हो रहे हैं। सीएम डैश बोर्ड पर भी जिले की रैंकिंग नहीं सुधर पा रही है।
मनरेगा की गड़बड़ी रुक नहीं रही,अफसर के पास मनरेगा का प्रभार
एनआरएलएम वंदना सिंह के पास मनरेगा डीसी का भी प्रभार है। जिले में मनरेगा का हाल खराब है। फर्जी तरीके से मजदूरों की हाजिरी, पशु शेड निर्माण में गड़बड़ी और मनरेगा के अन्य कार्यों में गड़बड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं। जांच भी हुई, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। मनरेगा लोकपाल की जांच भी ब्लॉक स्तरीय अफसरों के स्पष्टीकरण में अटकी है। वहीं एनआरएलएम का काम भी तेजी नहीं पकड़ पा रहा।
पीओ डूडा का पद रिक्त, प्रभार के भरोसे प्रोबेशन
पीओ डूडा का पद भी लंबे समय से रिक्त है। यह विभाग भी प्रभार के सहारे चल रहा है। आवासों का सत्यापन और अन्य काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। लोगों की समस्याओं का भी समाधान नहीं हो पा रहा है। प्रोबेशन विभाग भी प्रभार के भरोसे ही संचालित हो रहा है। कुछ माह पूर्व प्रोबेशन अधिकारी प्रगति गुप्ता के स्थानांतरण के बाद से यह पद रिक्त चल रहा है। बरेली की प्रोबेशन अधिकारी को ही पीलीभीत की जिम्मेदारी दी गई है।
पंचायत विभाग भी संभाल रहे प्रभारी अधिकारी
कुछ दिन पहले जिला पंचायत राज अधिकारी रोहित भारती अवकाश पर चले गए हैं। पद रिक्त हुआ तो एआर कोऑपरेटिव प्रदीप को पंचायत विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। दो विभागों के कामकाज का जिम्मा एक ही अफसर के पास होने से कामकाज प्रभावित होने लगा है। इसी तरह कुछ नगर पंचायतों का प्रभार भी एसडीएम के पास है। इनमें नगर पंचायत बरखेड़ा और जहानाबाद शामिल है।
रैंकिंग भी हो रही प्रभावित, अफसर बन रहे अनजान
अफसरों की लापरवाही से जिले की रैंकिंग भी बिगड़ती जा रही है। जहां जून माह में पूरे जिले की रैंकिंग 16 वीं आई थी। वहीं जुलाई माह में यह रैंकिग बढ़ कर 36 पहुंच गई। इसके अलावा अगर विकास भवन की बात की जाए, तो यह रैंक जून माह में पांच थी। अब यह 18 पहुंच गई है। इससे साफ जाहिर हो रहा है।