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यहां आतंकी भी ठहर जाए तो पता न चले!

Sun, 13 Aug 2017 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  पीलीभीत।
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hotel - फोटो : अमर उजाला
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सड़कों पर पुलिस का अलर्ट, होटल-धर्मशालाओं से निगाहें फेरी  
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नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा जिला होने पर भी लापरवाही  
एसपी के आदेश पर सड़कों पर चेकिंग कर सख्ती का ढिंढोरा पीटने वाली पुलिस का ध्यान होटल और धर्मशालाओं पर नहीं है। महीनों से पुलिस ने न तो यहां के आंगन्तुक रजिस्टर को चेक करना मुनासिब समझा, न ही ठहरने वाले लोगों की आईडी चेक की। खास बात है कि स्वतंत्रता दिवस के करीब आने पर सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी होने के बाद भी अनदेखी जारी है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर कोई आतंकी भी यहां आकर ठहर जाए तो शायद पुलिस को पता न चले।  
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होटल और धर्मशालाओं को चेक न करने के पीछे कई कारण भी हो सकते है। पहला यह कि कप्तान ने जब सड़कों पर संदिग्धों की तलाश के निर्देश दिए हैं। फिर पुलिस होटलों को चेक करने की जहमत क्यों उठाए? अफसरों को खुश करने के लिए सड़कों पर ही अधिकाधिक चालान कर जुर्माना वसूलने में जुटी है। हर बार पंद्रह अगस्त और 26 जनवरी या फिर प्रदेश स्तर से हाईअलर्ट घोषित होने के बाद पुलिस होटल, धर्मशालाओं में चेकिंग की औपचारिकता निभा जिम्मेदारी पूरी कर लेती है। हालांकि यह चेकिंग अफसरों को भेजे गए फोटो में तो सख्त दिखती है, लेकिन हकीकत काफी जुदा है। होटल में चाय-नाश्ता कर इसको पूरा कर लिया जाता है। संदिग्ध भले हाथ से निकल जाए, लेकिन होटल मालिक को कोई तकलीफ न हो। इसका पूरा ख्याल रखा जाता है। जबकि साफ तौर पर होटल में ठहरने वालों की औंचक चेकिंग कराई जानी चाहिए। नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा जिला होने के बावजूद यहां पर थाना से लेकर अफसरों का इस ओर रवैया बेपरवाह बना हुआ है।  
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