फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pilibhit News: प्रधानमंत्री मोदी को 56 इंच की बांसुरी देना चाहती हैं हिना, मुख्यमंत्री को कर चुकी हैं भेंट

Fri, 01 Sep 2023 04:36 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

बांसुरी उद्योग से जुड़ीं हिना को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके परिवार की चौथी पीढ़ी बांसुरी बना रही है। हिना के पति नबाव की मौत हो चुकी है। इसके बाद से वह खुद इसे धंधे को संभाल रही हैं। 
विज्ञापन
पीएम मोदी को बांसुरी भेंट करना चाहती हैं हिना - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पीलीभीत में बनीं बांसुरियों की धुन देश-दुनिया में गूंजती है। यहां के बांसुरी उद्योग से 250 से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। शहर के मोहल्ला बसीर खां निवासी हिना भी बांसुरी बनाती हैं। हिना ने बताया कि उनको कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को 55 इंच की बांसुरी दी थी। अब वह प्रधानमंत्री को 56 इंच की बांसुरी भेंट करना चाहती हैं। जल्द ही वह उन्हें बांसुरी भेंट करेंगी। 

विज्ञापन


पति की मौत के बाद हिना संभाल रही हैं काम
नवाब की पत्नी हिना बताती हैं कि उनके पति की तीन साल पहले मौत होने के बाद अब वही पूरा काम देख रही हैं। यह उनकी चौथी पीढ़ी है जो बांसुरी बनाती है। कच्चा माल असम से मंगवाते हैं। इसमें ट्रेन सुविधा न होने के कारण काफी खर्चा होता है। मंडल में ही बांसुरी के लिए बांस की पैदावार के लिए बरेली के सीबीगंज में दो साल पहले पौध लगवाई गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। 

ये भी पढ़ें- स्वामी प्रसाद मौर्य पर कार्रवाई की मांग: महंत ने कहा- अगर पुलिस ने दर्ज नहीं की रिपोर्ट तो करेंगे अनशन
विज्ञापन


असम से एक ट्रक माल मंगवाने में करीब 80 हजार का खर्च आता है। मौजूदा समय में बांसुरी को लेकर अभी कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन सकी है। मांग भी काफी कम हो गई है। शहर में करीब तीन दशक पहले दो हजार परिवार इस काम में लगे थे। अब मात्र दो-तीन सौ परिवार ही रह गए हैं। सरकार को बांसुरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। 

विज्ञापन

ओडीओपी में शामिल है बांसुरी उद्योग 

प्रदेश सरकार ने पीलीभीत के बांसुरी उद्योग को एक जिला-एक उत्पाद की श्रेणी में शामिल किया है। यहां 250 से ज्यादा परिवार बांसुरी बनाने का काम करते हैं। यह उद्योग पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार 200 साल से चला आ रहा है। मौजूदा समय में जिले में इस उद्योग से जुड़े लोग अब दूसरा धंधा शुरू करने की योजना बना रहे हैं। 

कारण है कि सरकार की ओर से एक जिला-एक उत्पाद में शामिल इस उद्योग को आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद बाहर से कच्चा माल मंगाने पर हो रहा खर्च निकालना दूभर हो रहा है। इधर, बांसुरी के ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं। कच्चा माल खराब हो रहा है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें