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अपने पर भरोसा रखें, पीछे रह जाएंगे टोकने वाले

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पीलीभीत। जेएमबी इंस्टीट्यूट में मंगलवार को ‘मेरी कहानी, मेरी जुबानी’ शीर्षक से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रशिक्षु पीपीएस अधिकारी ज्योति यादव, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया और महिला शिक्षक अनीता विश्वकर्मा और अनामिका मिश्रा ने अपनी कामयाबी के अनुभव साझा किए। ज्योति यादव ने छात्राओं से कहा कि वे खुद पर यकीन कर आगे बढ़ें। रोकने और टोकने वाले पीछे रह जाएंगे।
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अमर उजाला के अपराजिता/100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में सवाल-जवाब के सत्र में कई बेटियों ने कहा कि जब कोई उनका मजाक बनाता है या फिर उनकी क्षमता, योग्यता पर सवाल करता है तो वे निराश हो जाती हैं। ऐसे में या करें।
प्रशिक्षु डिप्टी एसपी ज्योति यादव ने कहा कि पहले खुद पर यकीन करें फिर आगे बढ़ें। रोकने और टोकने वाले पीछे रह जाएंगे और आप कामयाबी के शिखर तक पहुंच जाएंगी।
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महिला अस्पताल की सीएमएस ने कहा- अपने दिल की आवाज सुनना सीखें तो कामयाबी की राह खुल जाएगी। इसी तरह अनीता विश्वकर्मा ने कहा- हमें गर्व करना चाहिए कि हम महिला हैं। इतना सोचें और समझें तो हर चुनौती को पार कर जाएंगी।
अनामिका मिश्रा ने कहा कि माता-पिता को अपना दोस्त समझें और उनसे हर बात शेयर करें बाधाएं दूर होती जाएंगी और कामयाबी की इबारत लिख जाएगी। इन्हें सुनने के बाद बेटियों ने कहा कि सिर्फ नौकरी हासिल करना ही अब उनके जीवन का मकसद नहीं रहेगा। अपने जीवन में वे एक अच्छे इंसान के तौर पर अपनी पहचान बनाएंगी।
अपने सपने साकार करेंगी और माता-पिता के साथ साथ अपने परिवार और शहर का भी सम्मान बढ़ाएंगी।
बेटियों ने अपने सपने बताए
मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं। अब इसके लिए मैं अपने व्यक्तित्व में आवश्यक बदलाव करूंगी।- मिताली वर्मा
मैंने सेल्फ स्टडी से सिविल सेवाओं की तैयारी का माध्यम बनाया है। मैं अफसर बनकर अपने सपने को साकार करूंगी। - समरीन जहां
मैं टीचर बनना चाहती हूं। इसके लिए मैंने बहुत कुछ सीखा है। जहां जरूरत पड़ेगी वहां गाइडेंस लूंगी लेकिन लक्ष्य से पीछे नहीं हटूंगी। - अदीबा
कोई कितना ही हतोत्साहित करे मैं अपने लक्ष्य को हासिल करके ही रहूंगी। इलके लिए अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव ले करुंगी।- ज्योति पाल
मेरा सपना एक अच्छी शिक्षिका बनने का है। जहां मुझे परेशानी होती है मैं अपनी टीचर्स से गाइडेंस लेती हूं।- नूर-ए-सहर
मुझे आईएएस बनना है, इसके लिए मैंने ऑनलाइन माध्यमों से पढ़ना सीखना शुरू कर दिया है।- उला कुरेशी
मुझे पढ़ाई के साथ-साथ यूपीएससी के लिए तैयारी करनी है। इसमें परिवार का प्रोत्साहन मुझे ऊर्जा देता है।- प्राची शुक्ला
अपने सपनों को पूरा करने के लिए अब से मुझे अपने आत्मविश्वास पर और अधिक काम करना है। - सिद्रा अली
मुझे अपनी मेहनत और लगन से अपने परिवार के सामने साबित करना है कि मैं आईएएस बन सकती हूं।- निशा अंसारी
मेरा विषय अंग्रेजी साहित्य है, इसे आईएएस के लिए मैं अपना सबसे मजबूत विषय बनाना चाहती हूं।- तलआत फातिमा क़ादरी
अतिथियों ने दिए सफलता के सूत्र
मैं नवीं क्लास में शुरूआती तीन महीने आर्ट से पढ़ी। लेकिन मुझे वह पढ़ाई पसंद नहीं आई। साइंस की पढ़ाई के प्रति मेरा रुझान था मैंने अपनी मां को बताया तो मां ने पिता से बात की और इसके बाद मेरा साइंस साइड की पढ़ाई के लिए दाखिला कराया गया। मैं पढ़ने और आगे बढ़ने के हौसले को मैंने बनाए रखा और कभी निराश नहीं होना पड़ा। पोस्ट ग्रेजुएशन करके स्त्री रोग विशेषज्ञ बनी, पर पढ़ना और आगे बढ़ना अभी तक छोड़ा नहीं है।
- डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस, महिला अस्पताल
मैं बहुत ज्यादा पढ़ाकू नहीं थी। न ही मैंने पढ़ाई के घंटे तय किए थे लेकिन जब पढ़ती थी तो जितना तय कर लेती ती उतना पढ़कर ही दम लेती थी। इसीसिए मैं यही कहूंगी तो जो ठान लोगे उसमें सफलता मिलेगी। सबसे पहले तय करो कि आप करना क्या चाहते हो। आज के हर सब्जेक्ट में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा है। पढ़ने लायक सामग्री भी मिल जाती है लेकिन इसका फायदा तभी है जब आप अपना लक्ष्य तय कर लो और उससे डिगो नहीं। अगर एक बार तय करो तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
- ज्योति यादव, पीपीएस अधिकारी
पहले मैं सिंगर बनना चाहती थी। इंटरमीडिएट करते-करते मैं शिक्षक बनने को अपना लक्ष्य बनाया। फिर बहुत लोगों ने हतोत्साहित किया। लेकिन मैं पीछे नहीं हटी और 2016 में जब सरकारी स्कूल में टीचर बन गई तो वही लोग मेरी मिसाल देने लगे जो मुझे एक दौर में हतोत्साहित करते थे। इसलिए किसी के रोकने टोकने पर विचार न करें, बल्कि खुद इस तरह से तैयारी करेंगे कामयाबी कामयाबी आपके कदम चूमने के लिए खुद आ जाए।
- अनीता विश्वकर्मा, सहायक अध्यापक, बेसिक प्राइमरी स्कूल
- मैं हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में प्रथम रही और बीएसी में टॉप किया। एमएससी और बीएड में प्रथम रही। मैं प्रथम प्रयास में ही टीजीटी की परीक्षा पास कर गई। मेरा लक्ष्य राजकीय हाईस्कूल में शिक्षिका बनने का था। मैंने इसमें सफलता पाई। मैं यही कहूंगी कि अगर आपने कोई लक्ष्य तय कर लिया है तो उसके लिए तब तक जुटे रहें जब तक कामयाबी न मिल जाए। सोशल मीडिया का उतना ही इस्तेमाल करें जितना जरूरी है। अगर सोशल मीडिया में खो गए तो आपका लक्ष्य सिर्फ सपना बनकर रह जाएगा। साकार नहीं हो पाएगा।
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- अनामिका मिश्रा, शिक्षक, राजकीय हाई स्कूल महोप
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