पीलीभीत। शारदा नदी का पानी भले ही घट गया है लेकिन ग्रामीणों की दुश्वारियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाढ़ के चलते बेघर हुए ग्रामीण अब घरों को लौट रहे हैं। हालांकि जिनके घर (झोंपड़ी, कच्चे घर) बह गए हैं वे अभी तिरपाल के नीचे ही गुजारा कर रहे हैं। सरकारी मदद भी नाममात्र मिला है।
जिले के 100 से अधिक गांव बाढ़ प्रभावित हैं। प्रशासन की सूची में बाढ़ प्रभावित 78 गांव हैं। क्षति का सर्वेक्षण अधूरा है। बाढ़ में बही सड़कों पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है जबकि शारदा नदी की बाढ़ के पानी से बहे मार्जिनल बांध की मरम्मत शुरू कर दी गई है। इधर, शारदा नदी का पानी कम हुआ तो लोग घरों को लौटने लगे। कई ग्रामीणों को तब पता चला कि उनके घर बह गए हैं। वे घरों को दोबारा बनाना चाहते हैं लेकिन आर्थिक स्थिति से कमजोर होने पर वे मजबूर हैं। ऐसे में वे तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे हैं। उन्हें प्रशासन की ओर मदद की आस लगाए हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार मदद के नाम पर जो मदद को आए वे भोजन के पैकेट तक सीमित रहे।
यह हैं हालात
टूटी झोंपड़ी को ठीक करने में जुटे
नौजल्हा नंबर दो कुतिया कवर निवासी कृष्ण पाल ने बताया कि सोमवार की रात वह अपनी बूढ़ी मां, पत्नी और दो बच्चों के साथ घर में सो रहा था। अचानक घर में पानी आ गया और देखते ही देखते गांव डूबने लगा। घर में भगदड़ मच गई। परिवार को गांव के ही मोती देवनाथ के ऊंचे स्थान पर बने घर में लेकर पहुंचे। पानी रहने तक चार दिन वहीं बिताएं। गांव से पानी हटने के बाद जब घर वापस लौटे तो सब तितर-बितर देखा। झोंपड़ी नुमा घर टूटा पड़ा था। कीचड़ फैली थी। घर को दुरुस्त करने के प्रयास कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने जो खाने के पैकेट दिए वही खाए। अब राहत सामग्री मिली है उससे बसेरा कर रहे हैं।
घर को ठीक करने के लिए नहीं मिली कोई आर्थिक मदद
कुतिया कबर निवासी चंद्र बारोई का कहना है कि नदी का किनारा होने से घर में पूरी तरह पानी भर गया था। पड़ोस के सुरक्षित मकान पर पहुंचे। दो दिन तक वहीं डेरा जमाए रहे। छतों से देखा तो घर टूट गया उस में रखा सामान भी नष्ट हो गया। जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों ने खाने-पीने का इंतजाम कराया। राहत सामग्री भी मिली है। घर को सही करने के लिए रुपये का इंतजाम नहीं है।
घर बनाने के लिए सरकार से आर्थिक मदद का इंतजार
नौजल्हा निवासी आरती सरकार ने बताया बाढ़ के पानी में घर टूट गया। दो किलोमीटर दूर गभिया सहराई में जाकर शरण ली थी। दो दिन वहीं रहे। इसके बाद वापस लौटे तो घर टूटा देखा। अब घर को सुधारने के प्रयास में जुटे हैं। सांसद ने राहत सामग्री भेजी है। घर ठीक करने के लिए सरकारी मदद का इंतजार है।
घर से बेघर हुए अब तिरपाल डालकर रह रहा पूरा परिवार
चूका बाजार निवासी उत्तम मंडल का कहना है कि परिवार में छह लोग की जिम्मेदारी कंधों पर है। शारदा की बाढ़ में घर टूट गया। परिवार बेघर हो गया। अब मार्ग पर पल्ली तिरपाल डालकर परिवार का गुजारा कर रहे हैं। राहत सामग्री भी हम लोगों के पास नहीं पहुंची। प्रधान के स्तर से कुछ खाने पीने का इंतजाम किया गया वही सहारा बना हुआ है।