पीलीभीत। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के कारण मंगलवार सुबह से दोपहर तक बनवसा बैराज से करीब छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से शारदा नदी बीस साल पुराने दृश्य में दिखी। शारदा नदी के पानी से सीमावर्ती गांव कुतिया कवर डूब गया। रमनगरा क्षेत्र में चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। सिंचाई विभाग के अफसर और कर्मी बचाव कार्य में जुटे हैं।
बिना अलर्ट के शारदा नदी में बनवसा बैराज से छोड़े गए पानी ने रमनगरा क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। बाढ़ के पानी से लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है। करीब छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से शारदा नदी उफना गई। नदी का पानी ओवरफ्लो होकर कुतिया कवर, नौजल्हा नंबर एक में घुस गया। मंगलवार को शारदा नदी ने बीस साल पुराने दृश्य की याद दिला दी। हर तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा। कुतिया कवर गांव पूरी तरह डूब गया। इसके अलावा नौजल्हा, नलडेंगा, रमनगरा बुझिया, मझारा, वीरखेड़ा आदि गांव में काफी दायरे में घरों में पानी घुस आया। नदी की स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीणों ने बसों और अन्य वाहनों की मदद से पलायन कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचना शुरू कर दिया। रमनगरा बुझिया में भी स्थिति काफी खराब रही। यहां नदी के किनारे के बसी आबादी पूरी तरह से डूब गई। सिख समुदाय से जुड़े लोगों ने कारसेवा शुरू कर पानी में फंसे लोगों की मदद करनी शुरू की।
कई स्थानों पर संपर्क मार्ग हुआ बाधित
शारदा नदी के उफनाने के बाद हर तरह पानी ही दिखाई देने लगा। सीमावर्ती गांव कुतिया कवर में अत्यधिक पानी घुसने से संपर्क मार्ग बाधित हो गया। इसके अलावा नलडेंगा गांव में भी डैम से जाने वाला मार्ग पूरी तरह बंद रहा। ग्रामीणों ने गभिया सहराई मार्ग का प्रयोग कर खुद को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
कई स्परों के क्षतिग्रस्त होने का बढ़ा खतरा
सीमावर्ती गांव के ग्रामीणों के मुताबिक शारदा नदी में ऐसी बाढ़ करीब बीस साल पूर्व आई थी। उस समय काफी नुकसान हुआ था। इस बार बरसात के दौरान भी ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई। मंगलवार को नदी का छह लाख होने से आबादी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति तो पैदा हो ही गई, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्र में बने कई महत्वपूर्ण स्परों का भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
एसएसबी और पुलिस ने चलाया रेस्क्यू अभियान
शारदा नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद वैसे तो कई गांव जलमग्न हो गए, लेकिन बंदरभोज, कुतिया कवर और नौजल्हा गांव में पूरी तरह डूब गया। पानी की अधिक मात्रा होने से ग्रामीण मय परिवार फंस गए। स्थिति को संभालने के लिए क्षेत्रीय पुलिस के अलावा एसएसबी और पीएसी की टीम रेस्क्यू किट के साथ मौके पर पहुंची। मोटरबोट की मदद से पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
धान समेत अन्य फसलें हुई नष्ट
जलस्तर बढ़ने के बाद आबादी क्षेत्र के साथ फसलें भी पूरी तरह नष्ट हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ फसल ही कटी थी कि नदी में बाढ़ आ गई। इससे मुख्य रूप से धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। कुछ अन्य लगी सब्जी भी पानी में बह गई।
शारदा नदी के पार के हाल भी हुए बेहाल, कई लोग फंसे, मवेशी भी बहे
शारदा नदी उफान ऐसा आया कि चंद घंटों में ही नजारा बदल गया। नदी के इस पार तो अफरा तफरी मच ही गई साथ ही शारदा नदी के पार के हाल भी बेहाल हो गए। नदी के पार स्थित गोरखडिब्बी, गुन्हान, थारू पटटी का क्षेत्र क्षेत्र टापू बन गया। कई लोग पानी बढ़ने के बाद फंस गए। उन लोगों का संपर्क भी टूट गया। इसके अलावा नदी के पार स्थित गौढ़ियों के मवेशी भी पानी में बह गए।
डीएम ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा
शारदा नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद हालात बिगड़ने की सूचना पर मंगलवार दोपहर बाद डीएम पुलकित खरे ने भी बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर हालात परखे। बाढ़ और शारदा सागर खंड के अभियंताओं को जरूरी बचाव कार्य करने के निर्देश दिए। इसके अलावा राजस्व अधिकारियों को भी पूरी नजर रखने को कहा।
एक नजर
समय - क्यूसेक
सुबह नौ बजे- 4,75,960
सुबह 10 बजे- 4,90,132
सुबह 11 बजे- 5,04,304
दोपहर 12 बजे- 5,33,884
दोपहर एक बजे- 5,47,224
दोपहर दो बजे- 5,47,224
दोपहर बाद जलस्तर हुआ कम
शाम तीन बजे 5,33,884
शाम चार बजे 5,18,484
बोले ग्रामीण: दशकों बाद देखी ऐसी बाढ़, सब हुआ बेहाल
सोमवार रात अचानक नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ। मंगलवार को स्थिति बिगड़ गई घर डूब गए। फसल नष्ट हो गई। परिवार और जरूरी सामान को बमुश्किल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। - हीरा मोहन विश्वास, नलडेंगा
शारदा नदी में बीस साल पुरानी बाढ़ आई है। हर तरफ पानी ही पानी है। खुद की नावों का इस्तेमाल कर परिवार को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। प्रशासन को मदद के लिए आगे आना चाहिए। - देव प्रसाद मंडल