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Pilibhit News: हजारा में बाघ-तेंदुओं का खौफ, शाम में सड़कों पर छा रहा सन्नाटा

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शारदा पार हजारा गांव के पास लगा वन विभाग का चेतावनी बोर्ड, इसमें शाम छह बजे के बाद आवागमन न करन
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जंगली जानवरों की दहशत से एक लाख आबादी हो जाती है घरों में कैद, रात में हुटर बजाकर गश्त करती है पुलिस
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पीलीभीत। शारदा नदी पार बसे हजारा क्षेत्र में शाम ढलते ही जिंदगी की रफ्तार थम जाती है। दिनभर खेतों और बाजारों में दिखाई देने वाली चहल-पहल शाम छह बजे के बाद धीरे-धीरे गायब होने लगती है। सात बजते-बजते सड़कें सुनसान हो जाती हैं। वजह है जंगल से निकलकर आबादी के बीच पहुंच रहे बाघ और तेंदुए। करीब एक लाख की आबादी वाला यह इलाका इन दिनों इंसानों और हिंसक वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव के साए में जी रहा है।
पूरनपुर तहसील क्षेत्र के शारदा पार हजारा इलाके में एक तरफ नदी का किनारा है तो दूसरी ओर जंगल और गन्ने के खेतों का विस्तार। नेपाल सीमा भी यहां से सटी है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल के साथ ही लखीमपुर खीरी के संपूर्णानगर क्षेत्र का वन क्षेत्र भी आसपास है। यही भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में करीब एक दर्जन बाघ और करीब 20 तेंदुए सक्रिय हैं। संवाद
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थाने के पास बाघ, नदी किनारे बाघिन का बसेरा
हजारा थाने से चंद कदम की दूरी पर ही बाघ की मौजूदगी ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, एक बाघ अक्सर आसपास दिखाई देता है, जबकि नदी किनारे बाघिन अपने शावकों के साथ डेरा जमाए हुए है। जंगल, नदी, गन्ने के खेत और आबादी के आसपास पर्याप्त शिकार मिलने से वन्यजीवों को यहां से लौटने की जरूरत नहीं पड़ रही।
छुट्टा मवेशी, जंगली सुअर, हिरन और कुत्ते इनके आसान शिकार बन रहे हैं। नदी में पानी की उपलब्धता और गन्ने के खेतों में छिपने की जगह ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार दिन में भी सड़क या खेत के किनारे बाघ और तेंदुए दिखाई दे जाते हैं। रात में इनकी मौजूदगी का डर और बढ़ जाता है।
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पुलिस की गश्त बनी ग्रामीणों का सहारा
वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सूचना देने के बाद भी कई बार वन विभाग का फोन नहीं उठता और टीम मौके पर नहीं पहुंचती। पीलीभीत जिले की आबादी और लखीमपुर खीरी के वन क्षेत्र के बीच प्रशासनिक स्थिति होने से भी ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय पुलिस ही ग्रामीणों के लिए सहारा बनी हुई है।
एसओ हजारा शरद यादव बताते है कि जहां भी बाघ व तेंदुओं की सक्रियता की सूचना मिलती है तो पुलिस की सरकारी गाड़ियां रात में हूटर बजाते हुए क्षेत्र में गश्त करती हैं, ताकि जंगली जानवर आबादी से दूर रहें और ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बना रहे।

शाम छह बजे के बाद घरों से नहीं निकलते ग्रामीण
सुखविंदर सिंह कबीरगंज निवासी बताते हैं कि शाम छह बजे के बाद गांव में लोग अपने घरों में पहुंच जाते हैं। सात बजे के बाद सड़क पर निकलने की हिम्मत नहीं होती। आए दिन बाघ और तेंदुआ दिखाई देने की खबर मिलती रहती है। भुर्जानिया गांव के निखिल कुमार ने बताया कि गन्ने के खेतों में कब कौन सा जानवर बैठा हो, पता नहीं चलता। अकेले खेत पर जाने में डर लगता है। कई बार समूह बनाकर जाना पड़ता है।
कबीरगंज के इंद्रदीप सिंह बताते है कि पहले बाजार देर रात तक खुला रहता था। अब शाम होते ही ग्राहक कम हो जाते हैं और दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। लोग बच्चों को शाम के बाद घर से बाहर नहीं भेजते हैं।
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हजारा क्षेत्र का इलाका शारदा नदी पार लखीमपुर खीरी वन रेंज में लगता है। पीटीआर की टीमेें अपने इलाके में लगातार सक्रिय रहकर वन्यजीवों पर नजर रखती हैं। लोगों को वन्यजीवों से बचाव के लिए जागरूक भी किया जाता है।
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-मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर

वन रेंज क्षेत्र के अंतर्गत 28 गांव व दो थाना क्षेत्र आते हैं। जहां से भी सूचना मिलती है, फोन उठाता हूं, तत्काल टीम भी जाती है। क्षेत्र बड़ा होने के कारण पहुंचने में विलंब हो जाता है, लेकिन सबका फोन उठता है। इससे पहले भी कोई घटना या सड़कों पर बाघ तेंदुआ देखने की सूचना आई तो मैं मौके पर गया।
- ललित कुमार, वन रेंजर, संपूर्णानगर खीरी
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