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Pilibhit: किसान नेता ने पांच एकड़ खेत में जलाई पराली, तहसीलदार ने लगाया पांच हजार रुपये का जुर्माना

Sun, 08 Oct 2023 05:55 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

सेटेलाइट से निगरानी की जा रही है। अफसर गांव-गांव घूमकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। इसके बावजूद पराली जलाई जा रही है। पूरनपुर में एक किसान नेता ने नियमों का धुआं उड़ाते हुए पांच एकड़ खेत में पराई जलाई। 
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पराली जलाते किसान नेता बलजिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत जिले में पराली न जलाई जाए, इसके लिए अफसर गांवों और खेतों में घूम रहे हैं। लेकिन रविवार को गांव मुझा कलां निवासी अन्नदाता किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव ने पांच एकड़ में खड़े धान को काटकर पराली जलवाई। उनके समीप के एक अन्य किसान ने पराली जलाई। पराली जलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। इसके बाद किसानों पर जुर्माना लगाया गया है। 

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कृषि विभाग के अफसरों के साथ प्रशासनिक अफसर भी गांवों में घूमकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। जगह-जगह किसानों को सामूहिक रूप से एकत्र कर पराली न जलाने की अपील करने के साथ पराली जलाने के नुकसान की जानकारी दे रहे हैं। सेटेलाइट के जरिए निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद भी पराली जलाने के मामले नहीं थम रहे। 

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पूरनपुर क्षेत्र में रविवार को गांव मुझा कलां निवासी किसान नेता बलजिंदर सिंह ने अपने पांच एकड़ के खेत में खड़ी पराली को जलवाया। उन्होंने कहा कि पराली जलाना प्रतिबंधित नहीं है। किसान आंदोलन के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने पराली जलाना अपराध नहीं बताया था। उन्होंने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के वे साथ हैं।

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तहसीलदार हबीबउर रहमान अंसारी ने बताया कि गांव मुझा में बलजिंदर सिंह ने अपने और अपने भाइयों के खेत में पराली जलाई है। पराली जलाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। इसके अलावा गांव सुंदरपुर और पिपरिया मझरा में दो किसानों ने पूर्व में पराली जलाई थी। दोनों से ढ़ाई-ढ़ाई हजार रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। दोबारा पराली जलाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में पराली को किसी कीमत पर नहीं जलने दिया जाएगा। 

बगैर एसएमएस वाली कंबाइनों से हो रही धान की कटाई
पराली न जलाई जाए, इसके लिए कंबाइन हार्वेस्टर के पीछे एक्स्ट्रा मैनेजिंग सिस्टम (एसएमएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया था। बगैर एमएसएम के कंबाइन मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी कृषि विभाग के अफसरों ने दी थी। मगर क्षेत्र में अधिकांश बगैर एसएमएस लगी कंबाइनों से धान की कटाई की जा रही है। धान कटने के बाद धान की बाली छोड़कर शेष अवशेष खेतों में खड़े रहते हैं। इससे किसान पराली जला रहे हैं।
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