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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में अगले महीने से गूंजेगी हाथियों की चिंघाड़

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Elephants' chirping will resonate in PTR's forest from next month
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पीलीभीत। पीटीआर के जंगल में मई से हाथियों की चिंघाड़ गूंजेंगी। वनकर्मी हाथियों पर सवारी करके वन क्षेत्र की निगरानी करेंगे। कर्नाटक से हाथी लाने की जिम्मेदारी लखीमपुर के वन निगम को दी गई है। शासन से मार्च में बजट मिलने के बाद वन निगम को उपलब्ध करा दिया गया है। हाथी लाने के लिए पीटीआर की ओर से 50 लाख का प्रस्ताव भेजा गया था।
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पीलीभीत के जंगल को जून 2014 में टाइगर रिजर्व का खिताब मिला था। इसके बाद बाघों के संरक्षा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गईं थीं। शुरूआती दौर में आए दिन मानव-बाघ संघर्ष होने से लोगों में भय व्याप्त होने लगा। जंगल के अंदर वनकर्मियों को गश्त में भी दिक्कत हो रही थी। जंगल के बाहर बाघों के निकलने से उनको पिंजरे में कैद करने या फिर ट्रेंक्युलाइज करने के लिए दुधवा से हाथी मांगने पड़ते हैं। पीटीआर में पर्यटकों को हाथी के दीदार भी नहीं होते हैं। कर्नाटक के बंगलूरू से हाथी लाने के लिए कवायद शुरू की गई थी।
इसी को लेकर दिसंबर 2021 में मुख्य वन संरक्षक गणेश भट्ट, डीडी नवीन खंडेलवाल, एसडीओ सत्यपाल प्रसाद, डॉ. दक्ष गंगवार और महावत इरशाद बंगलूरू जाकर हाथियों को पसंद किया और छह हाथी लाने के लिए तैयारी शुरू की। टीम ने हाथियों का मेडिकल परीक्षण करने के बाद एनओसी के लिए आवेदन कर दिया था। इसके साथ ही पीटीआर प्रशासन की ओर से 50 लाख के बजट का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इस पर शासन ने बजट को मंजूरी देते हुए मार्च में पीटीआर प्रशासन को बजट भेज दिया। अब हाथी लाने की जिम्मेदारी पीटीआर प्रशासन ने लखीमपुर खीरी के वन निगम को सौंपी है। वन निगम कर्नाटक से हाथी लेकर पीटीआर प्रशासन को मई में सुपुर्द कर देगा। हाथी लाने के लिए वन निगम को मार्च में बजट भी दे दिया गया है।
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तो बजट सुरक्षित करने के लिए वन निगम के दिया गया है जिम्मा - मार्च में वित्तीय वर्ष का समापन होने पर बजट पर शासन की ओर से रोक लगा दी जाती। इससे फिर साल भर हाथियों को लाने के लिए कवायद करना पड़ती। इसी के देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने मार्च में हाथियों को लाने का जिम्मा वन निगम को दे दिया और बजट भी निगम को दे दिया। इससे बजट को लेकर अब कोई रोड़ा नहीं बनेगा।
तीन माला और तीन बराही रेंज में रहेंगे - हाथियों को लेकर तैयारियां अंतिम छोर पर है। तीन हाथी माला रेंज और तीन हाथी बराही रेंज में रखे जाएंगे। इसको लेकर हाथी शेड तेजी के साथ तैयार किए जा रहे है। इनकी देखभाल को छह महावत और छह चारागाह नियुक्ति किए जाएंगे। कर्नाटक से हाथियों के साथ आने वाले महावत यहां के जंगल से हाथियों को रूबरू कराने के साथ ही स्थानीय महावतों की पहचान कराएंगे। यहां की भाषा का भी हाथियों को ज्ञान देंगे।
तीस क्विंटल रोजाना है हाथियों की खुराक - पीटीआर प्रशासन के अनुसार एक हाथी 24 घंटे में पांच क्विंटल चारा खाता है। इससे सभी छह हाथी को एक दिन में 30 क्विंटल चारा देना होगा। चारा देने के लिए तैयारी की जा रही है। हाथियों की पसंद का चारा भी तैयार कराया जाएगा।
कर्नाटक से पीटीआर आने तक लगेंगे 15 दिन - कर्नाटक से हाथियों को ट्रकों से चलाया जाएगा। छह ट्रकों में हाथी और छह ट्रकों में उनके लिए चारा साथ लाया जाएगा। इसके अलावा रास्ते में सभी वन विभाग के कार्यालयों को चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएगा। जिससे रास्ते में हाथियों को चारे की दिक्कत न हो सके। 15 दिन में हाथी पीटीआर के जंगल में पहुंचेंगे।
चुनाव को लेकर टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पाई थी। अब आदर्श आचार संहिता हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सप्ताह भर में टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद टीम हाथी लाने के लिए रवाना हो जाएगी। कोशिश रहेगी की अप्रैल के अंत तक हाथी आ जाए। मई में तो आ ही जाएंगे।
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- आरके सिंह प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक, वन निगम लखीमपुर खीरी
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