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स्कूलों को सजाया संवारा, बच्चों को भी निखारा

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लखनऊ में उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त करते शिक्षक वैभव जैसवार। - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सेवारत कई युवा शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने और स्कूल सजाने संवारने में ऐसे प्रयोग किए हैं जो दूसरे शिक्षकों को भी कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर हम ऐसे ही कुछ शिक्षकों से रूबरू करा रहे हैं। आपको बताते चलें कि भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की याद में 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 11 सितंबर 2008 को मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू कराई थी।
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ऊर्जा संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया
सामुदायिक सहयोग से विद्यालय को समृद्ध बनाने की मुहिम में लगे कंपोजिट विद्यालय कैंच के शिक्षक वैभव जैतवार ने गांव में बच्चों के जरिए ऊर्जा संरक्षण की ज्योति जलाई। जिन बच्चों के अभिभावक सक्षम थे उन्होंने अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन किया और बिजली का बिल घटाया है। इसके लिए उन्हें यूपी नेडा की ओर से ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2017 मिला है। पढ़ाई-लिखाई के लिए स्मार्ट क्लास का सफलतापूर्वक संचालन करने पर उन्हें राज्य स्तरीय आईसीटी अवार्ड-2018 मिला। राज्य स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार 2019 तथा राज्य शिक्षक/राज्यपाल पुरस्कार-2019-20 भी मिल चुका है।
राष्ट्रीय स्तर छात्रवृत्ति परीक्षा में बच्चों को आगे बढ़ाया
उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहा के शिक्षक संतोष कुमार खरे ने पढ़ाई के साथ विभिन्न प्रतियोगिताएं कराते हुए बच्चों के दिमाग को विकसित करने का प्रयास किया। जिससे 18 बच्चे राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। चयनित बच्चों को केंद्र सरकार की तरफ 1000 रुपये प्रति माह चार वर्ष तक छात्रवृत्ति प्राप्त होती है। खरे ने शिक्षक साथियों के साथ मिलकर कक्षा 1 से 8 तक ऑल इन वन बेसिक प्रश्नोत्तरी एवं राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा पर पुस्तक लिखी जो पूरे उत्तर प्रदेश में काफी लोकप्रिय हुई।
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विद्यालय को संवारा बच्चों को कामयाब बनाया
अब कंपोजिट विद्यालय माधोटांडा प्रधानाध्यापक रहीं रूबी हाशिम खान ने 2013 में तब विद्यालय को संवारना शुरू किया। जब सरकारी योजनाओं का इतना सपोर्ट नहीं था। अपने वेतन से फर्नीचर बनवाया। सीसीटीवी कैमरे, एलसीडी को लगवाया। अब कंपोजिट अनुदान का सपोर्ट है। खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। प्रोजेक्टर से पढ़ाई कराई। इससे बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो रहा है। उन्हें जिलाधिकारी व बीएसए ने कई बार सम्मानित किया है। माधोटांडा में ऐसा कोई निजी विद्यालय नहीं है जिसमें सीसीटीवी कैमरे हों और प्रोजेक्टर से पढ़ाई कराई जाती हो। सुविधाएं ऐसे हैं कि विद्यालय में विद्यार्थी संख्या लगातार बढ़ रही है। अब पहली से आठवीं तक 450 बच्चे पढ़ते हैं।
यूपी में पीलीभीत के बच्चों को प्रथम लाने की है तैयारी
। उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहा के शिक्षक संतोष कुमार खरे ने बताया कि जानकारी न होने की वजह से राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा का लाभ पीलीभीत जिले के बच्चों को नहीं मिल पाता था। वर्ष 2019 में जब पहली बार बरहा के 09 और 2020 में 18 बच्चे इस परीक्षा में पास हुए तो इस योजना के बारे में रुचि बढ़ी। तत्कालीन बीएसए और डीएम ने भी सराहा। इसके बाद इस योजना का न केवल प्रचार किया गया बल्कि प्रति सप्ताह बच्चों का टेस्ट कराया जाने लगा। इससे बच्चे तैयारी कर रहे हैं। ललोरीखेड़ा ब्लॉक के सभी जूनियर विद्यालयों और अन्य सात ब्लॉकों के 70 जूनियर हाईस्कूलों में भी इसकी तैयारी की जा रही है। संतोष कुमार खरे का कहना है कि वह चाहते हैं यूपी में पीलीभीत जिले के सबसे अधिक बच्चे इस परीक्षा में पास हों और जिले का नाम रोशन हो। इसी हिसाब से तैयारी करा रहे हैं।
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