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बीसलपुर के सूर्यं प्रताप सिंह का सिविल सर्विसेज में चयन

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सूर्य प्रताप सिंह। - फोटो : PILIBHIT
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बीसलपुर (पीलीभीत)। रिटायर कानूनगो के बेटे सूर्य प्रताप सिंह आईएएस अफसर बन गए। सिविल सर्विसेज की परीक्षा में उन्हें 258वीं रैंक मिली।
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पीलीभीत के ग्राम मंडरा सुमन के मूल निवासी सूर्य प्रताप का परिवार बीसलपुर के मोहल्ला पटेल नगर में रहता है। सूर्य प्रताप सिंह आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण होने की जानकारी मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया। देर शाम तक बधाई देने का सिलसिला जारी रहाहै। परिजन के मुताबिक सूर्य प्रताप सिंह ने कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर बीसलपुर और कक्षा छह से दस तक की पढ़ाई पूरनपुर के इंग्लिश मीडियम स्कूल में की थी। इसके बाद कक्षा 11 और 12 की शिक्षा बरेली इंटर कॉलेज और बीए, एमए की शिक्षा बरेली कॉलेज में गृहण की थी। इसके बाद वह दिल्ली जाकर आईएएस की तैयारी करने लगे। उन्होंने पहले प्रयास में ही आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।
शुक्रवार की शाम परीक्षा फल घोषित हो हुआ था। इस सूची में उनका नाम क्रमांक 258 पर है। उनके पिता बाबूराम गंगवार सेवानिवृत्त कानूनगो हैं। उनके बड़े भाई आदित्य गंगवार सिंडीकेट बैंक में देहरादून में मैनेजर हैं। उनकी भाभी प्रीति वर्मा एफसीआई में मैनेजर हैं। उनके दूसरे नंबर के भाई आलोक सिंह मुंसिफ कोर्ट बीसलपुर में पेशकार हैं। उनके तीसरे भाई अनुराग सिंह राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है तथा छोटी बहन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है। आईएएस की सूची में नाम शामिल होने की जानकारी आते ही परिवार वाले खुशी से झूम उठे।
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एक चोट ने बदल दी सूर्य प्रताप की जिंदगी
पीलीभीत। सूर्यप्रताप सिंह का चयन वायुसेना के लिए जुलाई 2017 में हुआ था। ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने पर उन्होंने वायुसेना से त्याग पत्र देकर कुछ अलग करने का सोचा। आखिर में उन्होंने आईएएस बनने की ठानी।
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आईएएस परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद 258 नंबर पर नाम आया, तो सूर्य प्रताप सिंह खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। करें भी क्यों न वायुसेना से त्याग पत्र देकर कुछ अलग करने का जो सपना संजोया था वह पूरा हो गया। शुक्रवार की देर शाम दिल्ली से फोन पर सूर्य प्रताप सिंह ने बात की तो उन्होंने बताया कि जुलाई 2017 में वायुसेना में थे। इसके बाद अगस्त में ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने के कारण अक्तूबर में इस्तीफा देना पड़ा था। नवंबर में वापसी करने के बाद आईएएस बनने की तैयारी शुरू की। परिवार के साथ दोस्तों और सीनियर्स ने खूब हौसला अफजाई की। लगन और मेहनत से पढ़ाई की। दिल्ली में अपने सीनियर्स से मार्ग दर्शन लेते रहे। खुद में भी कुछ कर दिखाने का जुनून था। इससे पहली ही बार में परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने कभी हिम्मत नहीं हारने दी।
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