पीलीभीत। किसी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में परिवहन सेवा का महत्वपूर्णं योगदान होता है। परिवहन सेवा के बगैर विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। जिले की पांच तहसीलों में परिवहन सेवा पिछले कई सालों से पटरी से उतरी हुई है। आलम यह है कि 40 किलोमीटर दूर तहसीलों में पहुंचना टेड़ी खीर है। इसके मुकाबले देश की राजधानी 300 किमी दूर दिल्ली पहुंचना काफी आसान है।
रोडवेज डिपो की कुल बसों से आधे से अधिक बसें दिल्ली रूट पर संचालित की जा रही है। अन्य मार्गों पर लोगों को सरकारी बस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले का परिवहन तंत्र डग्गामार वाहनों के सहारे रह गया है। परिवहन निगम के स्थानीय डिपो के अभिलेखों के अनुसार सभी रूटों परन 94 बसों का संचालन हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें 12 बसे ऐसी हैं जो कंडम हो चुकी हैं और नीलामी की दहलीज में खड़ी हैं। जो कभी नीलामी प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगी। इसके बाद भी 30 से 40 बसों को मरम्मत के सहारे संचालित किया जा रहा है। यह बसें भी पूरी तरह से जर्जर हैं। इसके अलावा औसत 35 बसों को दिल्ली रूट पर संचालित किया जा रहा है। कलीनगर और अमरिया तहसील के लिए कोई बस सेवा नहीं है। सिर्फ उधर से गुजरने वाली बसों के सहारे ही यात्री है। ऐसे में यात्रियों के लिए दिल्ली जाना हो तो आसानी से बस मिल जाती है, मगर अमरिया और कलीनगर तहसील जाना हो तो कोई बस सेवा नहीं है। इससे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संचालन डग्गामार वाहनों के सहारे रह गया है। मैजिक संचालक लीक से हटकर तहसील पूरनपुर, बीसलपुर, पीलीभीत के मुख्य मार्गों पर रोज सवारियों को ढोते नजर आते है। किराया भी मन मुताबिक वसूल रहे हैं और यात्रियों को मजबूरन अधिक किराया देना पड़ता है।
किसी रूट पर कितनी संचालित हो रहीं बसें
दिल्ली रूट पर 35 बसों का संचालन किया जा रहा है। लखनऊ के लिए चार, शाहजहांपुर के लिए एक, बरेली के लिए पांच, टनकपुर के लिए दस, रुद्रपुर के लिए एक बस का संचालन हो रहा है। इसके अलावा गभिया सहराई और चंदिया हजारा से पूरनपुर होते हुए एक-एक बस दिल्ली के लिए चलाई जा रही है। पीलीभीत से पलिया के लिए दो, खजुरिया के लिए एक, कसगंजा के लिए एक बस का संचालन हो रहा है। पीलीभीत से अमरिया दिल्ली और पीलीभीत से अमरिया रुद्रपुर के लिए बस का संचालन किया जा रहा है।
सभी रूटों पर यात्रियों के अनुसार पर्याप्त बसों का संचालन किया जा रहा है। बसों की मरम्मत को लेकर भी गंभीरता से करने के निदेश दिए गए है। यात्रियों के अनुसार बसों को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। - वीके गंगवार, एआरएम रोडवेज डिपो