पीलीभीत। दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने बताया कि पूरे घर में बेटी की यादें बिखरी पड़ी हैं। कहीं पेेंटिंग लगी है तो कहीं किताबें रखीं हैं। कहीं उसके कपड़े रखे हुए हैं। घर का शायद ही ऐसा कोई कोना हो जो उसकी यादों से न जुड़ा हो। 16 वर्ष तक तीन कमरे के इस छोटे से घर में रही छात्रा के परिजन शनिवार को उस वक्त से हाल बेहाल हैं जब से यह पता लगा कि अब बेटी कभी नहीं आएगी। शनिवार को सुबह पौने सात बजे छात्रा घर से कोचिंग के लिए निकली थी और शाम पांच बजे तक उसकी मां की निगाहें घर के दरवाजे पर ही टिकीं थीं। जरा सी आहट पर यही लगता था कि बेटी आ गई लेकिन जब 11 बजे रात लाश मिल गई तब से आंसू आना शुरू हुआ और बार-बार आंसू आ रहे हैं।
दुष्कर्म पीड़िता की मां बोली - कोई मेरी फूलसी बेटी लौटा दे और अपराधियों को फांसी की सजा दिला दे
दुष्कर्म पीड़िता की मां को बेटी के हत्यारों को फांसी दिए जाने का इंतजार है। एक-एक पल बड़े दुख में बीत रहा है। आंसू इतने आए कि आंखें पथरा गईं। नींद चली गई भूख और प्यास भी बेचैन नहीं करती। कोई रिश्तेदार आती हैं तो एक दो निवाले मुंह में डाल देती हैं। सूखे पड़े गले को एक दो घूंट पानी पिलाकर गला तर करा देती हैं लेकिन अपने मन से मां ने 72 घंटे से कुछ खाया-पीया नहीं। वह बार-बार एक ही बात कहती है कोई मेरी फूलसी बेटी को लौटा दे। अपराधियों को फांसी दिला दे। बेबस मां की हालत देखकर घर वाले और रिश्तेदार भी परेशान हैं। बेटी की मौत के सदमे ने उसे हाल-बेहाल कर दिया है। अब जब भी कोई उससे हमदर्दी जाहिर करने आता है तो पल भर में उसकी आंख से आंसू आ जाते हैं। मुंह से आवाज नहीं निकलती लेकिन जब कोई पूछता है तो वह यही एक सवाल पूछती है अपराधी कब पकड़े जाएंगे। इस बीच दुष्कर्म पीड़िता के परिवार को सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। मगर दुख कम नहीं हो रहा।
मैं जिस तरह से अपनी बेटी के लिए तड़प रहीं हूं मैं चाहती हूं कि उसी तरह से अपनी जान के लिए अपराधी तरसें और तड़प-तड़प कर फांसी के फंदे पर चढ़ें।
- दुष्कर्म पीड़िता की मां