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दहेज उत्पीड़न में पति, सास और ससुर की सजा कम की

Sat, 16 Sep 2017 06:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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दहेज - फोटो : demo pic
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स्पेशल जज ने निचली अदालत के आदेश में किया परिवर्तन
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स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट पंकज कुमार उपाध्याय ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति, सास और ससुर को निचली अदालत से सुनाई गई सजा में बदलाव करते हुए इसे घटा दिया है। अलबत्ता तीनों आरोपियों को दहेज उत्पीड़न का दोषी पाते हुए सजा भी दी गई है।
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बरेली के थाना फतेहगंज पश्चिमी के गांव लोहार नगला निवासी जीशान, उसके पिता सईद अहमद और मां फरमूदन पर दहेज केे लिए विवाहिता शबनम का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। शबनम शहर से सटे गांव चिड़ियादाह की रहने वाली है। शबनम का विवाह जीशान के साथ 22 अक्तूबर 2012 को हुआ था। आरोप है कि दहेज में दो लाख रुपये की मांग को लेकर उसका उत्पीड़न किया गया। निचली अदालत में 15 दिसंबर 2015 को आरोपियों को दोषी पाकर धारा 323 आईपीसी में एक वर्ष की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 498ए आईपीसी में तीन वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना और धारा-4 डीपी एक्ट में दो वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना सुनाया था। इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। इसकी सुनवाई के बाद स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट पंकज कुमार उपाध्याय ने निचली अदालत की सजा को सही ठहराया, लेकिन सजा की अवधि कम कर दी। अब आरोपियों को धारा 323 आईपीसी में एक वर्र्ष के स्थान पर छह माह और धारा 498ए आईपीसी में तीन वर्ष की जगह दो वर्ष और दस के स्थान पर पांच हजार रुपये जुर्माना देना होेगा।
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