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तालाब में मिले गोवंशीय पशुओं के अवशेष, मचा हड़कंप

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जहानाबाद (पीलीभीत)। श्मशान घाट के पास तालाब में गोवंशीय पशुओं के अवशेष मिलने से हड़कंप मच गया। कस्बे के काफी लोग तालाब के पास जमा हो गए और नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। जहानाबाद पुलिस ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। दरोगा की ओर से अज्ञात के खिलाफ गोवध अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।
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नगर पंचायत जहानाबाद कार्यालय से कुछ ही दूरी पर श्मशान घाट से सटे तालाब में मंगलवार सुबह गोवंशीय पशु के अवशेष पड़े मिले। ग्रामीणों की नजर अवशेष पर पड़ी तो शोर मच गया। बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और घटना को लेकर आक्रोश जताया। चेयरमैन के पति दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना भी मौके पर पहुंच गए। सूचना पर इंस्पेक्टर कमल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मौका मुआयना कर एकत्र लोगों से जानकारी की। अधिकांश लोगों ने इसे माहौल खराब करने के लिए किसी की शरारत बताते हुए कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने पशु चिकित्सकों को बुलाकर अवशेष का परीक्षण कराया। इसके बाद उनको दफन कराया गया है। इंस्पेक्टर जहानाबाद ने बताया कि दरोगा विशेष कुमार की ओर से अज्ञात के खिलाफ गोवध अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपियों का पता लगाने को सुरागरसी की जा रही है।

सरकार की सख्ती के बाद भी जिले में नहीं रुक पा रहा गोकशी
पीलीभीत। प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद भी जिले में गोकशी नहीं रुक पा रही है। एसपी मनोज कुमार सोनकर समेत पुलिस अधिकारी लगातार मातहतों को गोकशी को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। गोकशी के पुराने अपराधियों पर रासुका, गैंगस्टर की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। एसपी की ओर से गोकशी के अपराधियों के जमानतदारों पर शिकंजा कसने की रणनीति भी काम नहीं आई है। लगातार घटनाओं को बेखौफ होकर अंजाम दिया जा रहा है। खेतों को स्लाटर हाउस बनाने के बाद अब जहानाबाद में सामने आई वारदात में श्मशान स्थल के पास ही गोवंशीय पशु की हत्या कर दिया जाना, कहीं न कहीं पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है। गोवंशीय पशु की हत्या करने में कम समय नहीं लगा होगा, फिर गश्त पर निकली पुलिस कहां थी? लापरवाही से जुड़े कई सवाल हैं। बावजूद इसके अधिकारी सख्ती नहीं कर पा रहे हैं। 2018 में कार्रवाई की बात करें तो 171 मुकदमे दर्ज हुए। 436 में से 378 आरोपी जेल भेजे गए। नौ के खिलाफ रासुका, 50 पर गैंगस्टर एक्ट और 102 पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। इसके बावजूद गोकशी के मामलों में 12.86 प्रतिशत की वृद्धि रही। पुलिस की मिलीभगत भी उजागर होती रही थी।
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