पीलीभीत जिले के छह मदरसों के संबंध दावत-ए-इस्लामी संगठन से होने की जानकारी पुलिस को खुफिया तंत्र को मिली है। पुलिस अधीक्षक ने इस विषय में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को अवगत कराया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इन मदरसा संचालकों को चिह्नित करके नोटिस जारी करेंगे। ताकि यह पता लगाया जा सके कि मदरसों को फंडिंग कहां से हो रही है। मान्यता है या नहीं। अगर किसी नियम का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई होगी।
पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी. ने बताया कि जिन मदरसों को कार्रवाई के घेरे में लिया गया है, उसमें एक न्यूरिया, एक जहानाबाद और चार पीलीभीत शहर में हैं। यह मदरसे वाराणसी की एक ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होते हैं। इन मदरसों में दावत- ए-इस्लामी की गुल्लक थी और चंदा एकत्र किया जाता था। चंदा कितना एकत्र होता था और किसके पास भेजा जाता था, ये जानने की कोशिश की जा रही है।
एसपी ने मदरसों और अन्य शिक्षण संस्थाओं के विषय में बेसिक शिक्षा अधिकारी और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें उन सभी संस्थाओं के नाम हैं, जिनके दावत-ए-इस्लामी से जुड़े होने का संदेह है। एसपी का कहना है कि अभी किसी तरह का प्रतिबंध संगठन पर नहीं है। एहतियाती सतर्कता के तहत छानबीन की जा रही है। अगर किसी नियम का उल्लंघन हो रहा तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि छह मदरसों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस का जवाब आए और जांच पूरी हो जाए, तभी कुछ कहा जा सकता है।
उदयपुर की घटना के बाद बढ़ी है निगरानी
उदयपुर की घटना में दावत- ए- इस्लामी का नाम आने के बाद से पुलिस और प्रशासन सतर्क है। इस संगठन से जुड़े लोगों और संगठन की गतिविधियों पर निगरानी है। संगठन की ओर से जिन दुकानों और मदरसों में चंदा एकत्र किया था। पुलिस और प्रशासन के खुफिया तंत्र ने वहां से जानकारी जुटाई है।