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भूख और इलाज के अभाव में पहले ही मर रहे गोवंश, अब सर्दी बनी आफत

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पीलीभीत। अभी तीन दिन पूर्व देवीपुरा गोशाला में तीन पशुओं की मौत का मामला सामने आने पर खानपान और इलाज के इंतजाम पर पहले ही सवाल उठ गए थे। अब गोशालाओं में रखे गए पशुओं को सर्दी से बचाने का कोई इंतजाम नहीं दिखता। न तो त्रिपाल ही लगाया गया है, न ही जमीन पर बिछाने के लिए कुछ डाला गया। ऐसे में पशु ठिठुर रहे हैं। उनमें बीमारी का खतरा भी बना हुआ है। मगर पशु पालन विभाग के जिम्मेदार सिर्फ कागजों में ही गोशालाओं में इंतजाम दुरुस्त करने में जुटे हैं। ब्लॉक के अधिकारियों की भी गंभीरता नहीं दिखती।
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जिले में बनाई गईं 26 गोशालाओं में लगभग ढाई हजार पशु रखे गए हैं। बजट न होने से गोशालाओं में लगभग तीन महीने से भूसा, चोकर आदि की दिक्कत आ गई थी। भूख और इलाज के अभाव में देवीपुरा गोशाला में तीन दिन पहले ही तीन गोवंशीय पशुओं की मौत भी हो चुकी है। अब सर्दी ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके गोवंशीय पशुओं की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं।
यहां बता दें कि बीते दिनों डीएम ने बैठक में स्पष्ट कहा था कि सर्दी से गोशाला में रखे गए किसी गोवंशीय पशु की मौत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सर्दी से बचाने के लिए सभी गोशालाओं में पर्याप्त इंतजाम करने को कहा था। यह भी कहा था कि गोशाला में तिरपाल बांधे जाएं। किसी भी हालत में गोवंशीय पशु खुले में नहीं रखे जाएंगे। इसके अलावा भी कई इंतजाम करने को कहा गया था। डीएम की बैठक में तो अधिकारियों ने सभी काम करने की हामी भर दी थी। मगर अब तक हुआ कुछ नहीं।
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वर्तमान में गोशालाओं में पशु सर्दी में जमीन पर पड़े ठिठुर रहे हैं। बचाव के इंतजाम कागजों में अपनाए जा रहे हैं। ऐसे में गोशाला में काम करने वाले कर्मचारी ही मान रहे हैं कि आने वाली सर्दी में पशुओं के बीमार होने और मरने की संख्या बढ़ सकती है।
पराली को भी खाने में ही खर्च कर दिया
बीते दिनों पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। उस वक्त प्रशासन ने पराली गोशाला भिजवाई थी। पशु पालन विभाग ने यह तय किया था कि इससे सर्दी से बचाने के लिए पशुओं का गद्दा बनाकर इस्तेमाल किया जाएगा। मगर जब भूसे का स्टॉक खत्म हुआ तो गोशाला के कर्मचारियों ने पराली को ही पशुओं को खिला डाला। एक गोशाला के कर्मचारी ने इसका दोष भी बेजुबान पशुओं पर ही डाल दिया। कहा कि पशुओं को पराली बिछाई गई थी, मगर उसे गंदा कर दिया और कुछ पशु पराली खा गए। फिलहाल किसी भी गोशाला में सर्दी से बचाव का कोई पुख्ता इंतजाम अभी नहीं।
सर्दी में होता है निमोनिया का खतरा
भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आरवीआरआई) के वैज्ञानिक भी सर्दी में पशुओं में निमोनिया का खतरा होने की बात कह चुके हैं। पशुओं को इससे बचाने के लिए खासा सतर्कता बरतने को कहा गया है। डायरिया भी हो सकता है। पशु एक दूसरे से भी संक्रमित हो सकते हैं।
कुछ गोशालाओं में काम बाकी, करा रहे इंतजाम
सर्दी से गोवंशीय पशुओं को बचाने के लिए गंभीरता से काम कराया जा रहा है। कई गोशालाओं में टाट पट्टी और त्रिपाल लगवाया भी गया है। कुछ गोशालाओं में काम होना बाकी है। इसे गंभीरता से करा रहे हैं। - डॉ. एके गर्ग, सीवीओ
अफसरों को दिए निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई तय
गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए गोशालाओं में इंतजाम दुरुस्त रखने के निर्देश संबंधित ब्लॉक और पशु पालन विभाग के अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। गोवंशीय पशु की ठंड से मौत नहीं होनी चाहिए, सभी को इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई तय है।
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- पुलकित खरे, डीएम
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