पीलीभीत। धान की कॉमन वैरायटी का सरकारी दाम 1940 व ग्रेड ए क्वालिटी के धान की कीमत 1960 रुपये प्रति क्विंटल है। मगर शासन- प्रशासन के अधिकारियों के सामने ही समर्थन मूल्य से 600 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर धान नीलाम हो रहा है। किसानों की आंखों के सामने उसकी मेहनत कौड़ियों में नीलाम हो रही है। न अफसर कुछ पा रहे हैं और न ही किसान संगठन। किसान अपनी आवाज तो उठा रहे हैं पर समाधान नहीं निकल रहा।
मंडी समिति में इस समय एक दिन में 6000-7000 क्विंटल धान प्रतिदिन आ रहा है। बिक्री के लिए बोली लगती है और धान नीलाम हो जाता है। सैकड़ों किसान मंडी अधिकतम दाम पर धान नीलाम करने की उम्मीद लेकर शुक्रवार को रात से ही मंडी पहुंचने लगे थे। शनिवार को सुबह से करीब पांच सौ किसान धान लेकर मौजूद थे। मंडी में राइस मिल मालिक और आढ़ती मिलाकर कुछ ही खरीदार थे। जो धान दो दिन पहले 1400 रुपये प्रति क्विंटल था वह शनिवार को घटकर 1200 रुपये पहुंच गया। किसान की उम्मीदों को झटका लगा तो किसान आंदोलित हो गए। धान न बेचने की बात आढ़तियों से कही। आढ़ती बोले जब धान मिल वाले आए ही नहीं तो दाम कैसे बढ़कर मिले। किसान सस्ता धान देेने को राजी न हुए तो तौल बंद हो गई। चार घंटे से अधिक समय तक तौल नहीं हुई।
खरीद-फरोख्त रुक जाने की सूचना मंडी प्रशासन को मिली तो मंडी सचिव अशोक कुमार ने एसडीएम को अवगत कराया। एसडीएम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मंडी पहुंचे। किसानों और व्यापारियों से वार्ता की। आढ़तियों ने कहा कि राइस मिल मालिक मंडी में धान खरीदें ताकि नीलामी प्रक्रिया से किसान को उचित दाम मिल सके। मंडी के आढ़ती संजय कुमार सिंह ने कहा- जिस तरह मध्य प्रदेश में मंडी में ही माल की खरीदारी होती है। वैसी ही व्यवस्था यहां लागू की जाए। किसानों ने कहा कि जब आमदनी दोगुनी की जानी है तो समर्थन मूल्य सुनिश्चित क्यों नहीं हो रहा है? इस सवाल का जवाब देते अधिकारियों ने कहा कि अगर किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचना चाहते हैं तो क्रय केंद्र पर बिक्री के लिए पंजीकरण कराएं। किसानों ने कहा कि पंजीकरण में दिक्कत हैं। अधिकारियों ने कहा- समाधान कराएंगे। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे नीलामी शुरू हुई लेकिन धान अधिकतम 1325 रुपये प्रति क्विंटल नीलाम हुआ। यानी समर्थन मूल्य से 605 रुपये प्रति क्विंटल दाम कम मिला। इससे किसान आक्रोशित नजर आए।
आढ़तियों की मांग - मंडी में खरीद करें राइस मिल मालिक
खाद्यान्न कल्याण समिति के पदाधिकारियों में विजय पाल सिंह, संजय कुमार सिंह, उमेश गंगवार, रघुवीर शरन आदि ने अधिकारियों से कहा कि सभी राइस मिल मालिक पहले की तरह मंडी में धान की खरीद करें तो किसानों को अधिकतम दाम मिल सकेगा।
काम नहीं है तो आराम कर लें
आमतौर पर मंडी में पल्लेदारों को सुबह नौ बजे से ही काम मिल जाता है लेकिन शनिवार को तौल नहीं हुई तो दोपहर 1.30 बजे के पल्लेदार खाली बैठे थे। तमाम पल्लेदार पेड़ की छाया में आराम कर रहे थे। उनका कहना था कि काम नहीं तो आराम ही कर लें।
किसानों का दर्द भी सुनिए
सरकार कहती है आमदनी दोगुनी होगी। यहां पर लागत वसूल नहीं हो रही है। जिससे लाग निकल पाना भी मुश्किल लग रहा है। - कृष्ण कुमार, किसान
मंडी में धान 1200-1250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है जबकि सरकारी समर्थन मूल्य 1940 व 1960 रुपये प्रति क्विंटल का है। - दर्शन सिंह, किसान
धान का जो दाम मिल रहा है, उससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार सिर्फ आमदनी दोगुनी कराने के दावे करने में व्यस्त है। - परमजीत सिंह, किसान
जब समर्थन मूल्य घोषित किया है तो उस पर खरीद सुनिश्चित क्यों नहीं होती? शासन और प्रशासन के अधिकारी जवाब दें। - जदुवीर सिंह, किसान
सरकारी धान क्रय केंद्रों पर शर्तों को लगाकर किसान को हतोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में किसान क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा । - कुलवीर सिंह, किसान