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गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की मांग बढ़ी पर उत्पादन कम

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समूह की महिलाओं ने बनाई गोबर से लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। गणेश चतुर्थी पर गाय के गोबर से बने लक्ष्मी-गणेश की मांग बढ़ी है। हालांकि जनपद में इसके उत्पादक तो है लेकिन बिक्री के लिए मूर्तियां बाजार में नहीं हैं। कुछ लोग स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाई जा रही मूर्तियों को खरीद कर घर में स्थापित कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि गोबर के बने गणेश की मूर्ति की स्थापना से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है।
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जनपद में 2900 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार देने के लिए शासन के निर्देश पर प्रशासन की ओर से बैंक सहायता दिलाई गई थी। जिससे महिलाओं को घर में ही रोजगार मिले सके। इसके लिए चयनित महिलाओं को एक लाख तक का ऋण बैंक से दिलाया गया था। सभी समूह अलग-अलग तरीके से काम करने लगे है। कुछ समूह गोबर से दीया, धूप बत्ती, अगरबत्ती, लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं भी बनाने का काम कर रहा है। इसमें देवीपुरा स्थिति चांद सहायता समूह की चंद्रकली ने बताया कि मेरौरी ब्लॉक की ओर से प्रतिमाएं बनाने को कहा गया था। इसके लिए मुंबई से फार्मा मंगाए गए थे। एक फार्मा से एक ही साथ में लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा बन जाती है। प्रतिमा बनाने के लिए गोबर और मिट्टी मिक्स करनी पड़ती है। मिट्टी मिलाने से प्रतिमा सूखने के बाद टूटती नहीं है। गोबर गोशाला से उपलब्ध कराया जाता है। पिछले एक सप्ताह से समूह की सभी दस महिलाओं ने 16 प्रतिमाएं बनाई हैँ। हालांकि अभी तक इनकी बिक्री नहीं हुई है।
मरौरी ब्लॉक के ब्लॉक मिशन मैनेजर नसीम अहमद ने बताया कि अभी छोटी-छोटी प्रतिमाएं स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाई जा रही हैं। इसकी कीमत करीब 10-15 रुपये रखी गई है।
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