पीलीभीत। शारदा नदी का विकराल रूप कई इलाकों को प्रभावित कर रहा है। वीरखेड़ा और खजुरिया क्षेत्र में 50 से अधिक किसानों की करीब डेढ़ सौ एकड़ कृषि भूमि अब तक नदी में समा चुकी है। रमनगरा बुझिया और बिजौरिया क्षेत्र में भी हालात ठीक नहीं हैं। इस क्षेत्र में भी नदी तेजी से कटान कर रही है। बुझिया में नुकसान का आंकलन करने के बाद तहसील प्रशासन की टीम ने सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर ली है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके में शारदा नदी पिछले कई दशकों से तबाही मचाती आ रही है। इस बार नदी ने गभिया सहराई क्षेत्र के नलडेंगा और रमनगरा बुझिया इलाकों में भू-कटान शुरू किया था। नलडेंगा क्षेत्र में मजबूत ठोकरें बनी होने से कटान की गति तेज नहीं हो सकी। रमनगरा बुझिया क्षेत्र में बाढ़ से निपटने के लिए ठोस कार्य न होने से नदी दाएं किनारे की ओर रुख कर किसानों की फसल खड़ी भूमि को काटना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही नदी ने यहां से आगे बढ़कर वीरखेड़ा में भी खूब कटान किया। यहां लगातार कटान के चलते नदी ने एक माह पूर्व से अब तक करीब पचास किसानों की डेढ़ सौ एकड़ सोयाबीन की खड़ी फसल समेत भूमि को निगल चुकी है। प्रधान संतोष कुमार ने बताया कि वीरखेड़ा में नदी के कटान में अब तक ग्रामीण राजेश कुमार की तीन एकड़, बासुदेव की तीन एकड़, कैलाश यादव , विजय शंकर, जगदीश शर्मा और राम भरत की दो एकड़ समेत करीब पचास किसानों की डेढ़ सौ एकड़ भूमि जा चुकी है। इस भूमि पर सोयाबीन की फसल खड़ी हुई थी। इसकी जानकारी तहसील प्रशासन को दे दी गई है।
बुझिया क्षेत्र में भी नदी से भूमि का कटान तेज
रमनगरा बुझिया में नदी ने कटान ज्यादा है। यहां नदी की चौड़ाई अधिक हो गई है। बाढ़ खंड की ओर से कोई ठोस कार्य न कराने से नदी ने दो दिन पूर्व से दोबारा कटान की गति तेज कर दी है। यहां अब तक किसान गौतम दत्त, तारा पद, विष्णु राहा, सुरेश राहा, विमल मिस्त्री, अशोक राय, भवानी राय समेत डेढ़ दर्जन से अधिक किसानों की भूमि का कटान कर लिया है। वहीं बिजौरिया निवासी दिनेश, महेश, गनेश, खरपत, ऋतुराज की करीब 25 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है।
क्षेत्रीय राजस्व टीम को मौके पर भेजकर नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - योगेश कुमार गौड़, एसडीएम कलीनगर