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UP News: नेपाल का वीजा लेकर भारत में घुसपैठ, पीलीभीत में बच्चे के साथ पकड़ा गया बांग्लादेशी दंपती

Tue, 04 Feb 2025 11:55 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत में शारदा सागर डैम की तलहटी में बसे विस्थापित परिवारों की आड़ में बांग्लादेश के लोग अवैध रूप से घुसपैठ करते रहे। मंगलवार को  गभिया सहराई गांव में चार साल के बच्चे सहित बांग्लादेशी हिंदू दंपती को पकड़ा गया है।
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बांग्लादेशी दंपती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तराई के जनपद पीलीभीत में नेपाल सीमा के नजदीक स्थित गभिया सहराई गांव में चार साल के बच्चे सहित बांग्लादेशी हिंदू दंपती को पकड़ा गया है। ये दंपती नेपाल के रास्ते यहां आकर शरण लिए था। पुलिस तीनों से पूछताछ कर रही है। 

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तराई क्षेत्र में शारदा डैम की तलहटी में विस्थापितों की बंगाली कॉलोनियां भी बसी हैं। ग्रामीणों के अनुसार दंपती बांग्लादेश में हुई हिंसा से प्रताड़ित हैं। वह 10 फरवरी तक की अवधि का वीजा लेकर 28 जनवरी को नेपाल आए थे।

नेपाल में ही उनकी जिले के बंगाली समुदाय के लोगों से बातचीत हुई। इसके बाद वह यहां आ गए। दंपती ने बताया कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार हो रहे हैं। वह वहां सुरक्षित नहीं हैं। ग्रामीणों ने उनकी परेशानी देख शरण दे दी।
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इधर, सूचना मिलने पर माधोटांडा पुलिस मंगलवार को दंपती को थाने ले आई है। थाना प्रभारी अशोक पाल सिंह ने बताया कि बांग्लादेशी दंपती से पूछताछ की जा रही है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे का निर्णय किया जाएगा।

चार दिन से लिए थे शरण, खुफिया इनपुट के बाद पहुंची पुलिस 
बताया जाता है कि बांग्लादेशी दंपती चार दिन पूर्व से गभिया सहराई गांव में शरण लिए हुए थे। इसकी किसी को भनक नहीं लग सकी। खुफिया एजेंसी को इस बात का इनपुट मिला। इसके बाद एसएसबी और पुलिस की टीम ने गांव में पहुंचकर दंपती को पकड़ा और थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की है।

पहले भी होती रही है घुसपैठ 
पीलीभीत में शारदा सागर डैम की तलहटी में बसे विस्थापित परिवारों की आड़ में बांग्लादेश के लोग अवैध रूप से घुसपैठ करते रहे। यही वजह है कि कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें नागरिकता प्रमाण न होने से आजतक मतदान का अधिकार नहीं मिल सका। मंगलवार को गभिया सहराई गांव के एक घर से बांग्लादेशी दंपती के पकड़े जाने के बाद अफसर गंभीर हुए। पूछताछ के दायरे को बढ़ाया गया है।

कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा सागर डैम की तलहटी में वर्ष 1965 से लेकर 71 तक पूर्वी पाकिस्तान से आए लोगों को सरकार के आदेश के बाद बसाया गया था। उनको भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद विस्थापित परिवारों की आड़ में बांग्लादेश के लोग अवैध तरीके से यहां आकर बसने लगे। बंगाली परिवारों की संख्या बढ़ने से कई तरह की अड़चनें सामने आने लगी।

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वर्ष 1991 में जमीन का मालिकाना हक छीन लिया गया। उसके पीछे बढ़ती संख्या कारण माना गया। इसके साथ ही तलहटी में बसे कई परिवारों के सामने नागरिकता की चुनौती भी सामने आई। नागरिकता प्रमाणपत्र न होने से उन्हें मतदान का अधिकार भी नहीं दिया गया। इनमें कई ऐसे परिवार हैं जिनकी तीसरी पीढ़ी नागरिकता प्रमाणपत्र के लिए संघर्ष कर रही है।
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नेपाल की खुली सीमा बनी अवैध आवाजाही का बड़ा कारण
कलीनगर तहसील क्षेत्र से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में छोटी-छोटी कॉलोनियां बसी है। इनमें बंगाली परिवारों की संख्या अधिक है। नेपाल की खुली सीमा होने के चलते अवैध आवाजाही रहती है। एसएसबी की ओर से सीमा पर गश्त को अंजाम दिया जाता है, लेकिन इसके बीच सीमावर्ती क्षेत्र से अवैध आवाजाही बनी रहती है।
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