पीलीभीत। दो साल पहले मृत हो चुके व्यक्ति के नाम से बीमा पॉलिसी कराकर उसकी रकम हड़पने की साजिश रची गई। करीब 20 लाख रुपये की पॉलिसी जारी होने के दो माह बाद मृत्यु के फर्जी दस्तावेज लगाकर क्लेम किया गया। कंपनी की जांच में पूरा मामला खुल गया। कंपनी के अधिकारी की तहरीर पर साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित पालसोरा निवासी उमेश कुमार ने एसपी के आदेश पर साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें बताया कि वर्ष 2022 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गूंगाकिन्ना क्षेत्र के ग्राम म्योली निवासी दलजीत सिंह के नाम से बीमा पॉलिसी के लिए आवेदन किया गया था।
कंपनी ने सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 28 दिसंबर 2022 को पॉलिसी जारी कर दी। इसके कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी रणजीत कौर ने चार मार्च 2023 को कंपनी में मृत्यु का दावा प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि दलजीत सिंह की 11 फरवरी 2023 को मृत्यु हो गई है।
दावे के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र, स्वलिखित बयान और पिथौरागढ़ के एक अस्पताल से जारी चिकित्सा दस्तावेज भी लगाए गए। पॉलिसी जारी होने के मात्र दो माह के भीतर मृत्यु का दावा आने पर कंपनी को संदेह हुआ और मामले की जांच शुरू कराई गई।
जांच के लिए भेजी गई टीम जब पिथौरागढ़ पहुंची तो वहां इस नाम का कोई भी व्यक्ति नहीं मिला। पड़ताल में सामने आया कि दलजीत सिंह का वास्तविक पता पीलीभीत जिले के पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बंजरिया में है। कंपनी की टीम ने गांव पहुंचकर दलजीत सिंह के पिता से मुलाकात की।
पिता ने बताया कि उन्हें किसी बीमा पॉलिसी के बारे में जानकारी नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे दलजीत सिंह की नवंबर 2020 में बीमारी से मृत्यु हो चुकी है। प्रधान ने भी इसकी पुष्टि की। जांच में सामने आया कि पॉलिसी में लगाए गए सभी दस्तावेज फर्जी हैं और मृत व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर बीमा राशि हड़पने की साजिश रची गई थी।
इस मामले में पुलिस ने पूरनपुर कोतवाली के ग्राम बंजरिया निवासी रणजीत कौर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। साइबर सेल प्रभारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।