पीलीभीत। भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों में जबरन धर्मांतरण कराने वाले सक्रिय हैं। एक गांव निवासी महिला और उसके बच्चों के मसीह समाज स्वीकार न करने पर पादरी और अन्य आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। नाबालिग पुत्री के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म का भी प्रयास किया। पीड़िता ने एसपी के सामने पेश होकर गुहार लगाई। इसके बाद हजारा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
हजारा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने एसपी के आदेश पर हजारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि 12 मई को वह अपनी नाबालिग पुत्री के साथ घर पर थी। आरोप है कि इस दौरान गांव के ही सतनाम सिंह, बलवंत सिंह, अर्जुन सिंह, मलकीत सिंह, सुरजीत सिंह, सुमित्रा कौर, बलवंत सिंह, मलकीत सिंह समेत कई लोग पादरी के साथ एक राय होकर सुबह करीब 10:30 बजे घर में घुस आए।
आरोपियों ने कहा कि हम तुम्हें ईसाई बनाकर ही छोड़ेंगे। उसने व बच्चों ने विरोध किया तो आरोपियों ने बुरी नियत से नाबालिग पुत्री के कपड़े फाड़ दिए। पास्टर अर्जुन सिंह, मलकीत सिंह उसे खेतों में खींच ले गए और दुष्कर्म करने का प्रयास किया। किसी तरह पुत्री को छुड़वाया, इस पर आरोपियों ने पुत्री के सिर पर लाठी से वार कर घायल कर दिया। आरोपियों की ओर से जबरन धर्मांतरण और दुष्कर्म करने का प्रयास किया गया।
पति को मकान बनवाने का लालच देकर कराया धर्मांतरण
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी उसके पति को दो लाख रुपये देने और मकान बनवाने का लालच देकर जबरन सिख से ईसाई धर्म स्वीकार कराया जा चुका है। आरोप है कि लंबा समय बीतने के बाद भी आरोपियों की ओर से कुछ भी नहीं दिया गया। आरोपियों ने बच्चों के साथ उस पर धर्म परिवर्तन कराने का दबाव बनाया, लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहती है। पति को दोबारा सिख धर्म में वापस लाना चाहती है। इन बातों का दर्ज रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।
गांव में न रहने की मिल रही धमकियां
पीड़िता का आरोप है कि जबरन दबाव डालने के बाद भी उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया। इसपर आरोपियों ने गांव में स्थित उसका घर गिरवा दिया। इसके बाद गांव में न रहने की धमकियां दी जाने लगीं। आरोपियों की दहशत के चलते पीड़ित परिवार खेत में बने घर पर रहने पर मजबूर है।
पुलिस-प्रशासन धर्मांतरण न होने का करता रहा दावा
हजारा क्षेत्र में जबरन धर्मांतरण कराने का मामला पूर्व से ही सामने आता रहा है। क्षेत्रीय लोग खुलकर इसके विरोध में भी उतरे थे। पूर्व में सिख समुदाय की ओर से मामले में शिकायत भी की गई, लेकिन पुलिस-प्रशासनिक अफसर धर्मांतरण न होने का दावा करते रहे। एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सच्चाई सामने आई। अब क्षेत्रीय लोग खुलकर धर्मांतरण की कलई खोलने को तैयार हैं। कई गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।