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Pilibhit News: बजट के अभाव में अटका कृत्रिम अंग निर्माण, कर्मियों का मानदेय भी लटका

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पुनर्वास केंद्र की वर्कशाप में शोपीस बनीं मशीनें संवाद
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पीलीभीत। आदर्श जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की वर्कशॉप में कृत्रिम अंग निर्माण का कार्य डेढ़ वर्ष से ठप है। बजट के अभाव में कच्चे माल की खरीद ही नहीं हो सकी। दिव्यांग जन को सहायक उपकरण मुहैया कराने को विभाग एलिम्को पर निर्भर है। पुनर्वास केंद्र में कार्यरत पांच कर्मचारियों को वेतन के भी लाले हैं। हालांकि विभाग के जिम्मेदार वर्कशाप के बजट और कर्मियों के मानदेय का प्रस्ताव भेजने की बात कह रहे हैं।
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से संचालित आदर्श जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का संचालन वर्ष 2000 में शुरू हुआ था। केंद्र में फिजियोथेरेपिस्ट, साइक्लॉजिस्ट, लेखाकार और अन्य कर्मियों की तैनाती की गई। दिव्यांगों को समय से सहायक उपकरण मुहैया कराने को केंद्र में कृत्रिम अंग निर्माण वर्कशाप भी स्थापित की गई। मशीनों की खरीद की गई और उपकरण बनाए जाने लगे। इस केंद्र से जिले के दिव्यांगों को काफी राहत मिली।। केंद्र में व्यायाम और दिव्यांगों के अभ्यास से संबंधित उपकरण भी खरीदे गए थे। रखरखाव और बजट के अभाव में आदर्श पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं।


वर्कशाप में बनते हैं यह कृत्रिम अंग
पुनर्वास केंद्र की वर्कशाप में कृत्रिम पैर और हाथ बनाए जाते हैं। इसके अलावा कैलीपर और बेल्ट का निर्माण भी होता है। कच्चे माल के अभाव में वर्कशाप की मशीनें बंद हैं। पुनर्वास केंद्र के समन्वयक सुखबीर सिंह भदौरिया ने बताया कि बजट के अभाव में निर्माण रुका है। किसी दिव्यांग के सहायक उपकरण में थोड़ी-बहुत खराबी आने पर उसे ठीक कर दिया जाता है।
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दो वर्षों से मानदेय की राह तक रहे पांच कर्मचारी
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र पर कार्यरत पांच कर्मचारियों को पिछले दो साल से मानदेय नहीं मिला है। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट, लेखाकार आदि शामिल हैं। कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। इसके बाद भी वे नियमित केंद्र पर आकर काम कर रहे हैं। दिव्यांगजन की मदद का पूरा प्रयास किया जाता है। बजट के अभाव में संसाधनों की कमी भी हो रही है।
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कुछ प्रक्रिया की वजह से बजट और मानदेय अटका था। प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसी महीने बजट आ जाएगा।
- सुरेश कुमार मौर्य, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी।

पुनर्वास केंद्र की वर्कशाप में शोपीस बनीं मशीनें संवाद

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