पीलीभीत। कलक्ट्रेट परिसर स्थित खंभे पर फाॅल्ट ठीक करने के दौरान करंट लगने से संविदा लाइनमैन विजय की मौत के बाद विद्युत निगम के संविदा कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। जिला अस्पताल में जुटे संविदा कर्मचारियों ने हंगामा करते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि फॉल्ट ठीक करने का अधिकांश काम संविदा कर्मियों से कराया जा रहा है, जबकि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। स्थायी कर्मचारियों को इन कार्यों में नहीं लगाया जाता। यह रवैया ठीक नहीं है। कर्मचारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
जिला अस्पताल में एकत्र 50 से अधिक संविदा कर्मियों का कहना था कि लोकल ग्रुप और अन्य माध्यमों से आने वाली फाॅल्ट की शिकायतों पर सबसे पहले उन्हें ही मौके पर भेजा जाता है। अधिकारियों की ओर से जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करने का दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप था कि विभाग में तैनात नियमित लाइनमैन अधिकतर मामलों में केवल निर्देश देने तक सीमित रहते हैं और जोखिम भरे कार्यों से दूरी बनाए रखते हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि इन दिनों बढ़ी फाॅल्ट की घटनाओं के कारण उन पर अतिरिक्त दबाव है। लगातार कार्य और जवाबदेही के चलते मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि दिन-रात फील्ड में रहकर काम करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। संवाद
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अधिकांश कर्मियों के पास नहीं सुरक्षा उपकरण
हादसे के बाद सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं। संविदा कर्मियों का कहना है कि विभाग की ओर से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में अधिकांश कर्मचारी बिना हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट और अन्य जरूरी उपकरणों के ही काम करते नजर आते हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, हादसे के समय विजय के पास भी आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं थे। वहीं, अधिशासी अभियंता आशीष यादव का कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं और उनके उपयोग के लिए लगातार निर्देश दिए जाते हैं। सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी भी कराई जाती है।
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वर्षों से एक ही क्षेत्र में तैनाती पर भी सवाल
संविदा कर्मियों ने आरोप लगाया कि कई स्थायी लाइनमैन वर्षों से एक ही क्षेत्र में तैनात हैं। इससे मनमानी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारी केवल औपचारिकता निभाकर अधिकारियों को फोटो भेज देते हैं, जबकि वास्तविक कार्य संविदा कर्मियों को करना पड़ता है। फाॅल्ट दूर करने से लेकर अन्य तकनीकी कार्यों का जिम्मा भी उन्हीं पर रहता है। आरोप है कि मोटा वेतन लेने पर भी लाइनमैन काम नहीं करते। संविदा कर्मियों से कराते हैं।
बिखर गई विजय की गृहस्थी
विजय के परिवार में पत्नी राखी, तीन वर्षीय पुत्र गणेश और पिता रामचंद्र हैं। घटना के समय उनकी पत्नी बरेली स्थित मायके गई थीं। हादसे की सूचना मिलने पर वह सीधे जिला अस्पताल पहुंचीं। पति की मौत की खबर सुनते ही वह बेसुध हो गईं। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत से घर में मातम पसरा हुआ है।
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घटना के बाद नहीं हटाया गया शटडाउन, पांच घंटे तक ठप रहा पुलिस लाइन फीडर
पीलीभीत। विजय की मौत के बाद गुस्साए संविदा कर्मियोंं ने हंगामा करने के साथ ही शटडाउन हटाने का विरोध किया। इससे पुलिस लाइन फीडर का शटडाउन नहीं हटाया जा सका। इससे केजीएन, पुलिस लाइन, कलक्ट्रेट, विकास भवन क्षेत्र की आपूर्ति ठप रही। सबसे अधिक समस्या पुलिस लाइन फीडर से जुड़े उपभोक्ताओंं और केजीएन कॉलोनी के लोगों को हुई। शाम साढ़े सात बजे से आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।
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पीड़ित परिवार को 7.50 लाख का मिलेगा मुआवजा : डीएम
पीलीभीत। घटना के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और नगर मजिस्ट्रेट व कलक्ट्रेट के नाजिर को बुलाकर घटना की जानकारी ली। डीएम ने बताया कि घटना दुखद है। ऊर्जा निगम और प्रशासन लाइनमैन के परिजनों के साथ है। लाइनमैन के परिजनों को आर्थिक मदद करने के लिए अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए हैं। करीब साढ़े सात लाख ऊर्जा निगम आर्थिक मदद करने को तैयार है। मामले को दिखवा रहे हैं। कहीं कोई लापरवाही हुई है तो कार्रवाई कराई जाएगी। संवाद
जिला अस्पताल में विजय के परिजन और अन्य संविदा कर्मचारियों से बातचीत करते विद्युत अधिकारी। संवा