माधोटांडा। कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा नदी के पार नेपाल सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत रमनगरा के किसानों को एसएसबी ने सीमित दायरे में खेती की अनुमति दे दी है। तीन दिन पूर्व एसएसबी जवानों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर संख्या 27 और 28 के बीच भारतीय क्षेत्र में खेती कर रहे काश्तकारों को जोताई से रोक दिया था। इसके बाद शनिवार को लगभग 36 किसान नगरिया कट स्थित एसएसबी कैंप पहुंचे और अपने पट्टे दिखाकर खेती की अनुमति मांगी।
तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत रमनगरा के तहत ग्रामीणों को शारदा नदी के पार दो-दो एकड़ भूमि के पट्टे आवंटित किए थे। तब से वे लोग उसी भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। किसानों का कहना था कि वे भूमिधरी अधिकार प्राप्त वैध पट्टेदार हैं। नोमैंस लैंड पर सीमा विवाद को देखते हुए पूर्व में एसएसबी ने काश्तकारों को जोताई करने से रोका था। इसको लेकर शनिवार को तीन दर्ज किसान नगरिया कट स्थित एसएसबी कैंप पहुंचे और अपना पक्ष रखा। एसएसबी अधिकारियों ने किसानों के लिखित प्रार्थना पत्र और भूमि दस्तावेज देखकर स्थिति पर विचार किया। जांच में पाया कि कुछ बंगाली मूल के अतिक्रमणकारी भी वन विभाग की भूमि पर खेती कर रहे थे जिनके पास कोई वैध कागजात नहीं थे। एसएसबी ने ऐसे लोगों को खेत जोतने से मना कर दिया।
वैध पट्टेदार किसानों को नोमैंस लैंड से 50 फुट की दूरी छोड़कर अपनी जमीन की जोताई की अनुमति दी है। एसएसबी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा विवाद या सीमांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसान सीमित दायरे में ही खेती कर सकेंगे। किसानों के साथ ग्राम प्रधान मनजीत सिंह, विवेकानंद ने बताया कि उनके पास शिवनाथ राजभर, रामदास राजभर, छोटेलाल गुप्ता और कुंवर राजभर आदि समेत 42 लोगों के पास वैध पट्टे हैं, जिन पर वे वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। एसएसबी की अनुमति मिलने से अब उन्हें राहत मिली है, जबकि अतिक्रमण करने वाले किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा।