मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के दिए निर्देश
पीलीभीत। बालिग युवती को फर्जी टीसी के जरिए नाबालिग दर्शाकर पॉक्सो एक्ट में फंसाने के आरोप के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगलदेव सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने तीन सगे भाइयों समेत छह लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना कराने के निर्देश थानाध्यक्ष को दिए हैं।
खटीमा के मोहल्ला इस्लामनगर निवासी मोहम्मद वसीम ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसका प्रेम विवाह मोहल्ला ग्यासपुर बीसलपुर निवासी अनवार हुसैन की पुत्री सवा से 22 मार्च 2024 को हुआ था, जिसका विधिक पंजीकरण भी कराया गया। आरोप है कि विवाह से युवती के परिजन खुश नहीं थे। युवती के भाई साहिल ने उसके और रिश्तेदारों के खिलाफ जबरन शादी और शोषण की रिपोर्ट थाना बीसलपुर में दर्ज कराई थी।
वसीम के अनुसार, उसकी पत्नी ने सुरक्षा की मांग को लेकर उच्च न्यायालय नैनीताल में याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने छह सप्ताह की सुरक्षा प्रदान की थी। आरोप है कि इसके बावजूद युवती के भाई साहिल, शमशुल समेत अन्य लोग लगातार दबाव बनाते रहे और जान से मारने की धमकी दी। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि 13 जनवरी 2026 को बीसलपुर पुलिस युवती को लेकर पीलीभीत कचहरी पहुंची। वहां सिविल लाइन पुलिस चौकी में युवती के भाई साहिल, शमशुल, खटीमा निवासी रेहान, बहनोई डॉ. फारुख व दो अज्ञात व्यक्तियों ने उससे दो लाख रुपये की मांग की।
आरोप है कि रकम न देने पर फर्जी टीसी बनवाकर पॉक्सो एक्ट में जेल भिजवाने की धमकी दी गई। आरोप है कि बाद में एक फर्जी टीसी विवेचक को उपलब्ध कराई गई, जिसमें युवती की जन्मतिथि 13 जुलाई 2008 दर्ज कर उसे नाबालिग दिखाया गया। यह टीसी उमराया सिंह इंटर कॉलेज दियोरिया कला के नाम से जारी दर्शाई गई थी। आरोप है कि विवेचक ने बिना सत्यापन किए ही पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ा दीं और उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि अगले दिन पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद और नैनीताल के आदेशों की प्रतियां प्रस्तुत कीं, जिसके आधार पर न्यायालय ने विवेचक को अभियुक्त को रिहा करने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। संवाद