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गोमती उद्गम स्थल को भी एक भागीरथ का इंतजार

Sun, 26 Oct 2014 05:34 AM IST
Pilibhit
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माधोटांडा। देश भर में भले ही स्वच्छ भारत अभियान का डंका बज रहा हो लेकिन अवध नगरी को अपना पावन स्पर्श कराने वाली जिले की गोमती नदी के उद्गम स्थल को आज भी किसी भागीरथ का इंतजार है। उद्गम स्थल जलकुंभी से पूरी तरह पट चुका है। पहले इस स्थल के दोनों ओर आदर्श तालाब विकसित किए गए थे, लेकिन लाखों खर्च के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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अवध नगरी की शोभा बढ़ाने वाली गोमती नदी को माधोटांडा स्थित फुल्हर झील से साफ सुथरा रखने, अविरल धारा बहाने को लाखों खर्च करने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया गया, लेकिन उद्गम स्थल आज भी दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। बसपा सरकार के कार्यकाल में गोमती संरक्षण अभियान के तहत तमाम पर्यावरणविदें और गंगा महासभा एवं लोक भारती के पदाधिकारियों ने 960 किमी की लंबी गोमती गंगा यात्रा निकालकर सरकार की नींद खोली थी।
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दो प्रोजेक्टों को मिली थी हरी झंडी
गोमती गंगा यात्रा के दौरान प्रदेश शासन के कैबिनेट सचिव भी यहां हेलीकाप्टर से पहुंचे थे। उन्होंने यहां वृहद योजना बनवाकर अविरल धारा बहाने को दो प्रोजेक्टों को मंजूरी दिलाई थी। पहले साढ़े पांच करोड़ की लागत के प्रोजेक्ट से हरदोई ब्रांच के उद्गम स्थल तक स्वच्छ पानी पहुंचाना था जबकि दूसरे 15.50 करोड़ के प्रोजेक्ट से जनपद की सीमा तक जगह-जगह लुप्त हो रही गोमती को चौड़ा करना था। इस कार्य की जिम्मेदारी बाढ़ खंड और पंचायत विभाग को सौंपी गई थी। कुछ कार्य भी हुआ लेकिन सरकार जाने के बाद योजना भी समाप्त कर दी गई।
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जिले में दो मंत्री फिर भी अस्तित्व खतरे में
गोमती उद्गम स्थल की फुल्हर झील लंबे अरसे से जलकुंभी से पटी पड़ी है। माधोटांडा ग्राम पंचायत और हरीपुर फुल्हर ग्राम पंचायत ने तालाब पर लाखों खर्च किए, लेकिन आगे बजट न मिलने से दोनों गंदगी से पटे हुए हैं। देश भर में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की योजनाओं पर कार्य जारी है लेकिन जिले में एक केंद्रीय मंत्री और एक राज्यमंत्री के होने के बावजूद यह धार्मिक आस्था से जुड़ी प्राचीन धरोहर अपने अस्तित्व को लेकर लड़ाई लड़ रही है।
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